नरेंद्र इंगले, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:
आजादी के बाद 1950 में संविधान लागु होने के उपरांत 1952 में लोकसभा के आम चुनाव हुए और पंडित नेहरु प्रधानमंत्री बने जिन्हें आधुनिक भारत का जनक भी कहा जाता है। आजादी के 70 साल बीतने के बाद आज भी हमारे इसी भारत में जाती के आधार पर अनु जाती और अनू जनजाती पर अत्याचार हो रहे हैं तो हम भारत को आधुनिक कैसे कह सकते हैं, ऐसा प्रहार बामसेफ़ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम ने व्यवस्था पर किया है। सहयोगी डाक्टरों द्वारा जातीगत रैगिंग का शिकार बनी नायर अस्पताल की मेधावी आदिवासी छात्रा डाॅ पायल तड़वी की कथित मौत से असंतुष्ट आदिवासी समाज की ओर से जलगांव में आयोजित राज्य स्तरीय जनाक्रोश मोर्चा के मंच से अपने संबोधन में मेश्राम बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार आदिवासी को हिंदू नहीं माना जाता, अगर कोई आदिवासी अपने मनमुताबिक किसी भी धर्म को स्विकारता है तब भी उसका स्टेटस ST यानी आदिवासी ही रहेगा।

डाॅ पायल तड़वी आदिवासी ही थी और उसी वर्ग से उनको मेडिकल में दाखिला मिला था। इस मामले में अभियुक्तों के खिलाफ़ पुलिस में दर्ज प्राथमिकि (FIR) में अनू जाती, अनू जनजाती कानून की धाराएं लगायी गयी हैं। दिल्ली में जब रोहित वेमुला के साथ अत्याचार हुआ तब देशभर में हंगामा हुआ था। हमारे संगठन ने भी आंदोलन चलाया वेमुला मामले पर सरकार को कई जांच कमेटियां बिठानी पड़ीं और आज डाॅ पायल उसी तरह शिकार बनायी गयी है। डाॅ पायल के मामले में दोषियों को कडी सजा दिलाने के लिए बहुजन क्रांति मोर्चा की ओर से कोर्ट में यह मुकदमा मजबूती के साथ लडा जाएगाह इसी बीच देश में SC/ST के खिलाफ़ हो रहे अत्याचार के विरोध में डाॅ पायल को न्याय मिलने तक आने वाले दिनों मेइ तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा, ऐसी चेतावनी मेश्राम ने दी। उन्होंने कहा कि समुचे भारत में SC/ ST के खिलाफ़ अत्याचार बढ रहे हैं। OBC की जातीगत गिनती क्यों नहीं करायी जा रही? धूमंतु जनजाती के करीब 12 करोड़ लोगों को हाशिए पर क्यों ढकेला जा रहा है, इन जैसे सैकड़ों सवालों की वजह केवल मनुवादी व्यवस्था है। 1950 को संविधान लागु तो हुआ लेकिन उसे पुरी तरह अमल में लाया ही नहीं गया। आज देश के प्रधानमंत्री मोदी मनुवादियों द्वारा उसी तरह मनोनीत हैं औजैसे पहले के पदस्थ लोग थे असली सत्ता साढेतीन प्रतिशत लोगो के पास है ! व्यवस्था परीवर्तन के लिए राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन कि आवश्यकता है जिसके लिए सभी 85 प्रतिशत मुलनिवासीयो को एक साथ आने कि अपील मेश्राम ने की।

मंच पर डाॅ पायल के माता – पिता श्रीमती आबिदा और सलीम तड़वी, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परीषद के प्रभारी प्रेमकुमार गेडाम, राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा के अध्यक्ष मोहम्मद अजहरी, सूनील गायकवाड समेत भारत मुक्ति मोर्चा के पदाधिकारी मौजुद रहे। आंदोलन की शुरुवात शिवतीर्थ मैदान से की गई। सागर पार्क मे विशाल जनसभा संपन्न हुई! प्रशासन के सुरक्षा मानकों वाले गतीरोध के कारण 20 सदस्यों के प्रतिनीधी मंडल ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर निवेदन पेश किया।
