1970 के दशक में प्रचलित गरारा सूट आज के दशक में ज्यादातर महिलाओं की बनी पहली पसंद, इस बार ईद पर ज्यादा डिमांड हुई गरारे सूट की | New India Times

फराज़ अंसारी, ब्यूरो चीफ, बहराइच (यूपी), NIT:1970 के दशक में प्रचलित गरारा सूट आज के दशक में ज्यादातर महिलाओं की बनी पहली पसंद, इस बार ईद पर ज्यादा डिमांड हुई गरारे सूट की | New India Times

कहते है जो दिन बीत गए है वह वापस नही आते मगर इस फैशन की चकाचोंध भरी दुनिया में सब कुछ मुमकिन है।
1970 दशक में आई फ़िल्म महबूब की मेहंदी के एक गाने में गरारा सूट पहने मुमताज पर फिल्माया गया गीत जिसने भी देखा उस समय हर एक के मन मे उस समय ऐसा सूट सिलवाने की चाह थी और खूब सिलवाये भी गये थे आज फिर वही पुराने दिन वापस आ गए। वजीरगंज बाजार स्थित कपड़ों के दुकानदारों कलीम, परवेज आलम, रोशन खान, कलीम अंसारी, जसीम, शहजादे, नौशद खान ने बताया कि 1970 में जो महिलाओं की पसंद थी ड्रेस गरारा आज उसी की वापसी हो गई है, हिंदी फिल्म महबूब की मेहंदी में मुमताज़ ने जो सूट पहना था आज 50 साल बाद सभी की पहली पसंद बन गई है गरारा सूट।
वो चाहे छोटी बच्चियां या बड़े ज्यादा डिमांड गरारे की ही की गई जिससे सभी दुकानदारों को माल न मिलने के कारण परेशानी हुई फिर भी सब से ज्यादा बिक्री गरारे की हुई है बाजार में लाखों रुपयों के गरारा सूट की अब तक बिक्री हो चुकी है।
वजीरगंज की मॉर्केट में खरीददारी करने आई पयागपुर के हैदराबाद के सिराज अहमद, मीहीपूर्वा से जुलेखा बेगम नानपारा से आए महफूज, इमामगंज से हफीज मेराज, जरवल से अफसाना बेगम, नवाबगंज, महसी महराजगंज, रिसिया,व आदि जगहों से महिलाओं व पुरुषों ने बताया कि जो शूट हमे इस मार्केट में मिल जाते हैं वो हमें नानपारा बहराइच में नही मिलते यहाँ की मार्केट में मुम्बई और सूरत से अच्छे कपड़ो में बेहतर डिजाइन के होते हैं।

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