सरवर खान जरीवाला, भोपाल, NIT;
कर्मचारियों की भर्ती-प्रक्रिया को लेकर हमेशा से चर्चा में रहने वाली मप्र विधानसभा एक बार फिर भर्ती को लेकर चर्चा में है। विधानसभा सचिवालय ने पिछले महीने आरक्षित वर्ग के 28 पदों के लिए भर्ती परीक्षा ली थी, लेकिन भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठने की वजह से विधानसभा सचिवालय ने अभी तक चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी नहीं की है। जिसको लेकर विधानसभा सचिवालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि विधानसभा में तृतीय वर्ग के कर्मचारियों की भर्ती बिना विज्ञप्ति के आयोजित की गई है।
वैसे विधानसभा एक स्वतंत्र संस्था है। उस पर सरकार द्वारा बनाए गए भर्ती नियम लागू करने की कोई बाध्यता नहीं है। लेकिन जिस तरह से मप्र विधानसभा के कर्ताधर्ताओं पर भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा करने के आरोप लगते आए हैं, उनसे बचने के लिए विधानसभा को पारदर्शी प्रक्रिया अपनानी चाहिए। विधानसभा सचिवालय ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर लगे सभी आरोपों को दरकिनार करते हुए पिछले महीने आरक्षित वर्ग के 28 पदों पर गुपचुप तरीके से भर्ती कर ली है। विधानसभा सचिवालय की ओर से बताया गया है कि भर्ती के लिए भोपाल, विदिशा, होशंगाबाद, सीहोर और रायसेन जिले के रोजगार कार्यालयों से नाम बुलाए गए थे। जो नाम आए, उन्हें भर्ती में शामिल होने के लिए बुलाया गया। विधानसभा ने पिछले महीने 9 एवं 10 फरवरी को भर्ती परीक्षा ली। बाद में जिन आवेदकों को भर्ती में नहीं बुलाया गया, उन्होंने कोर्ट जाने का मन बना लिया था। ऐसे में विवादों से बचने के लिए विधानसभा सचिवालय की ओर से भर्ती परीक्षा को एक महीना बीतने के बाद भी परिणाम घोषित नहीं किया है।
मप्र विधानसभा में भर्ती घोटाला मामले में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवाास तिवारी एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ पुलिस में केस दर्ज किया गया था
