आसिम खान, ब्यूरो चीफ, छिन्दवाड़ा (मप्र), NIT:

माननीय न्यायिक दंडाधिकारी अमरवाड़ा न्यायालय द्वारा क्षेत्र के बहुचर्चित मामले में आज अपना फैसला सुनाया है। वर्ष 2013 के बहुचर्चित पुलिस केस में तत्कालीन एसडीएम मोहम्मद फरहतुल्लाह खान और उनकी पत्नी श्रीमती रिफत खान के विरुद्ध फरियादी तत्कालीन शासकीय ड्राइवर शिवानंद वर्मा द्वारा थाना अमरवाड़ा में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि 1 मई 2013 को एसडीएम श्री फरहतुल्लाह खान और उनकी पत्नी ने गुंडों के साथ आकर शिवानंद वर्मा के शासकीय सिविल लाइन आवास गृह में घुसकर उसके साथ मारपीट की, अश्लील गालियां दीं और जान से मारने की धमकी भी दी। उल्लेखनीय है कि अमरवाड़ा थाना द्वारा उक्त प्रकरण में तत्कालीन एसडीएम और उनकी पत्नी श्रीमती रिफत खान के विरुद्ध अपराध अंतर्गत धारा 452, 294, 323, 327, 506 /34 भारतीय दंड विधान के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में दर्ज एफ.आई.आर. को श्री फरहतुल्लाह खान द्वारा उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। न्यायिक दंडाधिकारी अमरवाड़ा के न्यायालय में इस बहुचर्चित मामले में विगत 6 वर्षों से विचारण चला और अभियोजन की ओर से कुल 15 गवाह प्रस्तुत किए गए, जिसमें शिवानंद वर्मा, शिवानंद की पुत्री कुमारी समीक्षा, कुमारी प्रतीक्षा और राजस्व न्यायालय के कर्मचारी संजय हुईके, चंद्रभान, धनराज जी चंदेल, दिलीप डेहरिया, भोजलाल, रमेश बिनदेवारी तथा जांच अधिकारी शेख रफीक, श्री कालूराम झारिया, डॉक्टर हितेश रामटेके का परीक्षण कराया गया। श्री फरहतुल्लाह खान ने अपने बचाव में स्वयं गवाही दी और यह साबित किया कि वे 1 मई 2013 को शासकीय दौरे पर थे और उन्होंने होशंगाबाद की तहसील सोहागपुर मड़ई में निरीक्षण का कार्य किया था और यह साबित किया कि एक मामले में शिवानंद वर्मा को विभागीय जांच में दोषी पाया गया था तब तत्कालीन एसडीएम मैं स्वयं था इसलिए दुर्भावना वस मेरे विरुद्ध मामला बनाया गया है।

इस प्रकरण में आज माननीय श्री संध्या मरावी न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी अमरवाड़ा द्वारा निर्णय घोषित कर दोनों आरोपी फरहतुल्लाह खान और उनकी पत्नि रिफत खान को दोषमुक्त किया गया। दोष मुक्ति पर श्री फरहतुल्लाह खान ने कहा कि आज मुझे न्याय प्राप्त हुआ है। श्री फरहतुल्लाह खान और उनकी पत्नी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री राजेंद्र कुमार नेमा साथ में श्री डीसी चंद्रवंशी, श्री दुर्गेश वर्मा, श्री अखिल सोनी, श्री प्रकाश वर्मा, श्री संदीप नेमा अधिवक्ता गणों ने पैरवी की एवं अभियोजन की ओर से शासकीय अधिवक्ता श्री आलोक घोरमारे ने पैरवी की।
