अशफाक कायमखानी, सीकर/जयपुर (राजस्थान), NIT:
विधानसभा सभा चुनावों के अनुसार चोमू से भाजपा व खण्डेला से निर्दलीय विधायक के जीतने के साथ सीकर लोकसभा क्षेत्र में बाकी 6 विधायक कांग्रेस के जीतने के बावजूद भाजपा व कांग्रेस को मिले मतों में कोई अधिक अंतर नहीं रहने से कांग्रेस-भाजपा उम्मीदवारों को चिंतन में डाल रखा है। उक्त कांग्रेस-भाजपा दोनों दलों के अलावा भी अन्य दलों के उम्मीदवार चाहे चुनाव नहीं जीत पाये पर इन दलों के व निर्दलीय उम्मीदवारों को लोकसभा क्षेत्र की आठों सीटों पर मिले करीब दो लाख मतों से अधिक मतों पर अब भाजपा व कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवारों की जीत निर्भर करेगी।
तीन महीने पहले सम्पन्न हुये विधानसभा चुनावों में माकपा के अमराराम व पेमाराम ने अच्छी तादाद में व कुछ माकपा उम्मीदवारों के कम संख्या में मत पाये थे। माकपा के उम्मीदवारों को छोड़कर रालोपा के उम्मीदवारों ने भी एक लाख के करीब अच्छे खासे मात पाये थे। रालोपा के चोमू से उम्मीदवार रहे छूट्टन यादव व सीकर से उम्मीदवार रहे वाहिद चौहान को मिले मत वैचारिक नजदीकियों के चलते कांग्रेस उम्मीदवार को मिलना तय हो चुका है। नीमकाथाना से रालोपा उम्मीदवार रहे रमेश खण्डेलवाल को मिले मत भी वैचारिक तौर पर भाजपा के खिलाफ व कांग्रेस के नजदीकी मत माने जा रहे हैं। राजनीतिक समीक्षकों का तो यहां तक कहना है कि विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के मुकाबले छोटे क्षेत्रफल में होने के कारण भाजपा विरोधी मत उन चुनावों मे धोद व दांतारामगढ़ में माकपा उम्मीदवारों को जीत की उम्मीद में मत दिये थे लेकिन उनमें से अब अधीकांश मत फिर भाजपा को हराने के लिये माकपा की बजाये जीतने वाले कांग्रेस उम्मीदवार के खाते में आना माना जा रहा है।
सीकर से माकपा उम्मीदवार अमरा राम किसान वर्ग के मतों को टारगेट करके कितना कुछ कर पाते हैं यह देखना होगा। कांग्रेस उम्मीदवार सुभाष महरिया अपने ब्लॉक कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलनों में अपने भाषण में उक्त तरह के मतदाताओं को रिझाने के लिये कांग्रेस कार्यकर्ताओं को इलेक्शन इनविटेशन के बहाने हर मतदाताओं से राब्ता कायम करने की हिदायत दे रहे हैं। वह कहते हैं कि विभिन्न खुशी के अवसरों पर लोगों को आमंत्रित करने वालों की सूची सभी कार्यकर्ताओं के पास मौजूद है। उस सूची का उपयोग इलेक्शन इनविटेशन के लिये हर कार्यकर्ता बडी आसानी से कर सकता है। महरिया स्थानीय मुद्दों पर भी सभाओं में खूब बोलकर मतदाताओं को अपनी तरफ खींचने में लगे हुये हैं जबकि भाजपा उम्मीदवार भगवा रैलियों में बाईक पर घूम कर व अन्य प्रकार से मतदाताओं को घ्रूवीकरण व लामबंद करने की कोशिश कर रहे हैँ पर साल के 365 दिन सुभाष महरिया के चुनावी मोड पर रहने के कारण मतदाताओं से सीधे जुड़ाव का फायदा उनको मिलता नजर आ रहा है।
