वाकडी हत्या कांड: क्या सही दिशा में नहीं हो पा रही है जांच??? | New India Times

नरेंद्र इंगले, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र) NIT:

वाकडी हत्या कांड: क्या सही दिशा में नहीं हो पा रही है जांच??? | New India Times9 मार्च को वाकडी गांव के दबंगों द्वारा अपहरण किए गए विनोद की लाश 28 मार्च को मिलने के बाद उसी रात शव का अंतिम संस्कार किया गया लेकिन लोकसभा के आम चुनावों के बीच पीड़ित विनोद पर हुए अत्याचार को लेकर सोशल मिडीया पर कई सनसनीखेज खुलासे उबाल पर थे जिसमें हत्या कांड के लिए जिम्मेदार तथा फरार मास्टर माइंड शेखर वाणी को लेकर पार्टी विशेष के नेतृत्व को जमकर निशाना बनाया जा रहा था। यह बात अलग है कि आधिकारिक मीडिया और राजनितीक हलकों में भले ही वाणी के राजाशीष वाले इस बिंदु को सामने लाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गयी हो। इस घटना के बाद नेताओं और उन्हें चमकाने वाले संसाधनों द्वारा चुप्पी साधकर आदर्श आचार संहिता का किया गया सर्वोत्तम संयमित अनूपालन अपने आप में नए कीर्तिमान को स्थापीत करने के लिए हमेशा याद किया जाएगा। 27 मार्च को पीड़ित के परिजनों द्वारा न्याय के लिए रास्ता रोको आंदोलन करने के बाद हरकत में आए प्रशासन को दुसरे दिन यानी 28 मार्च को मृतक विनोद कि लाश मिलती है और उसी दिन 17 दिन से फरार चल रहा शेखर अचानक पंढरपुर से हिरासत में लिया जाता है। 17 दिन तक जांच में जुटी पुलिस को हासिल इस बडी सफ़लता को केवल संयोग तो नहीं कहा जा सकता है। इसके बाद पीड़ित के परिजनों को मनाकर उसी रात तनाव की स्थिति में मृतक विनोद का अंतिम संस्कार किया जाता है। इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासन की भूमिका किसी ऐसी फ़िल्मी स्क्रिप्ट जैसी प्रतीत होती है जिसमें लगता है कि प्रशासन की ओर से सब कुछ स्क्रिप्ट के मुताबिक किया गया हो। हत्या कांड की जांच के लिए विशेष पुलिस अधिकारी का मार्गदर्शन लिया जाता है। शेखर वाणी, महेंद्र राजपुत, नामदार तडवी, विनोद देशमुख के खिलाफ़ धारा 363, 364, 120 ब 341 व अनुजाति अत्याचार निवारण कानून की धारा 3 (2) ब के तहत दायर प्राथमिकि में अब अन्य संगीन धाराओं को पंजीकृत किया गया है। मामले में नामजद आरोपियों के अलावा अन्य तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने वारदात से जुडे काफ़ी सबुत भी जुटा लिए हैं, इसी बीच हत्या के मास्टर माइंड के तौर पर अचानक नए सिरे से उभरे महेंद्र राजपुत के अलावा कल तक इसी भूमिका के लिए चर्चा मे रहे शेखर वाणी को लेकर लोगों के बीच कुछ अलग सा माइंड सेट किए जाने की कोशिश साफ़ झलकती दिखाई पड रही है। अभी तो इस मामले में जांच को लेकर जानकारों में यह भी स्पष्ट रुप से रेखांकित किया जा रहा है कि क्या वाकई सही दिशा में जांच नहीं हो पा रही है या फ़िर नहीं कराई जा रही है?

मृतक के भाई विजय के प्रेस रिलीज में दबंगों द्वारा विनोद पर किए गए अत्याचार को लेकर पहले ही कई आरोप लगाए गए हैं जो वर्तमान जांच के बिंदुओ के कुछ विपरीत से मालूम पडते हैं। अब जब चार्ज शीट के साथ मुकदमा कोर्ट में फ़ाईल होगा तब शायद यह मांगें भी उठनी शुरु हो जाएंगी कि इस हत्याकांड की जांच एसआईटी, CID से करवाई जानी चाहिए। बहरहाल पीड़ित विनोद के परिजनों की सांत्वना के लिए वाकडी पहुंच रहे सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने मामले कि निष्पक्षता से जांच कराने की मांग की है।

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