ओवैस सिद्दीकी, ब्यूरो चीफ, अकोला (महाराष्ट्र), NIT:

स्थानीय निवासी मनीष गोपालराव देशमुख की शिकायत पर सिटी कोतवाली पुलिस ने 6 फरवरी 2019 को डोडिया परिवार के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया था। पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामले के बाद न्यायालय से जमानत पर बाहर आए डोडिया परिवार ने मुम्बई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में याचिका दायर की थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायामूर्ति झेड ए हक, विनय जोशी ने कोतावाली पुलिस को निर्देश दिए कि वह इस अपराध में बिना न्यायालय के मंजूरी के चार्जशीट दायर न करें। न्यायालय ने सिटी कोतवाली पुलिस तथा शिकायतकर्ता मनीष देशमुख को 10 अप्रैल् 2019 तक अपना पक्ष पेश करने के आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनिल मार्डिकर, सुमीत जोशी ने पैरवी की। बता दें कि डोडिया परिवार के खिलाफ अब तक कोतवाली पुलिस थाने में चार जालसाजी के मामले दर्ज किए है और उन सभी मामलों में चार्जशीट दायर न करने के आदेश हाईकोर्ट ने जारी किए है। हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक से पुलिस तथा बुध्दजीवियों में इस बात को लेकर चर्चा चल रही है कि शिकायकतों में तथ्य न होने तथा उनके खिलाफ 42 धनादेश के मामले वर्ष 2013 से 2017 के बीच दायर किए जाने से काऊंटर ब्लास्ट के तहत पुलिस थानों में शिकायतें दर्ज कराई गई है।
उपनिबंधक कार्यालय दे चुका है क्लीन चिट
मनीष गोपालराव देशमुख ने 13 जुलाई 2016 को डोडिया परिवार समेत 11 लोगों के खिलाफ जिला उपनिबंधक कार्यालय में अवैध साहूकारी की शिकायत दी थी। इस शिकायत की जांच के पश्चात कार्यालय की ओर से डोडिया परिवार को 23 मई 2017 को क्लीन चिट दे दी थी। जबकि 7 लोगों के खिलाफ कार्यालय की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर रामदास पेठ पुलिस ने उनके खिलाफ अपराध दर्ज किया था। वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट ने प्रशांत गणगे की चार्जशीट पर रोक लगाते हुए कहा था कि जब सभी लेनदेन चेक के माध्यम से तो वह अवैध साहूकारी की श्रेणी में कैसे आ सकता है। इसके विपरीत कोतवाली पुलिस ने यह अवैध साहूकारी की धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया था।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालियां निशान
सिटी कोतवाली पुलिस ने जो चार cमामले डोडिया परिवार समेत अन्य के खिलाफ दर्ज किए है उन सभी पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। पुलिस इन मामलों की जांच तो कर सकती है किंतु चार्जशीट दायर नहीं कर सकती। हाईकोर्ट के इस आदेश के पश्चात पुलिस विभाग की जांच ही सवालों के घेरे में आ गई है। चर्चा चल रही है कि डोडिया परिवार समेत अन्य के खिलाफ किसी दबाव तंत्र अथवा आर्थिक् लेनदेन के चलते तो पुलिस ने कहीं अपराध दर्ज नहीं किया क्योंकि जिन लोगों की शिकायत पर अपराध दर्ज किया गया है उनके खिलाफ तो पहले से ही न्यायालय में धनादेश के तकरीबन 42 मामले दर्ज है जो फैसले की कगार पर पहुंच गए है। इस बात की जानकारी या छानबीन करने की जरूरत पुलिस ने क्या महसूस नहीं की या फिर जानबूझकर अनदेखी की है।
शिकायतकर्ता के खिलाफ चल रहे हैं मामले
सिटी कोतवाली पुलिस थाने में अलग अलग चार शिकायतें डोडिया परिवार समेत अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज करवाने वाले मनीष गोपालराव देशमुख के खिलाफ 10, शैलेंद्र नारायण व्यास के खिलाफ 17, अनूप गुलाबराव आगरकर के खिलाफ 8 तथा प्रशांत गणगे के खिलाफ 7 समेत 42 मामले निगोशिएबल एक्ट की धाराओं के तहत चल रहे है। एक मामले में अनूप आगरकर को प्रथम श्रेणी न्यायालय सजा भी सुना चुका है जो सेशन कोर्ट ने बरकरार रखा था। जिसके बाद हाईकोर्ट में यह मामला विचाराधीन है।

महोदय
कोणतीही बातमी टाकन्या आधी बातमी बद्दल पुर्न माहिती जाणून घ्यावी एकदा तरी पोलिसांनी काय पुरावे गोळा केले याची माहिती घ्यावी मा.न्यायालयाचा निर्णय काय आहे हे नीट समजून घ्यायला हवे
अवैध सावकार अनुप डोडीया व त्याच्या घरचे यांना तालुंका उपनिबंधक तालुका अकोला कु सुरेखा फुफाटे हीने निर्दोष मुक्त केल्या मुळे कु सुरेखा हीला अकोला सोडून पळावे लागले याची माहिती जिल्हा उपनिबंधक कार्यालया कडून व जिल्हाधिकारी कार्यालया कडून घ्यायला हवी होती
मनिष देशमुख विरूद्ध मा न्यायालयात 138 च्या खोट्या केसेस कीती होत्या आणि आता कीती बाकी आहेत वापस का झाल्या याची माहिती घ्यायला हवी होती
क्रुपया असी क्वापी पेस्ट करून पेड न्यूज देउ नये अन्यथा कायदेशीर कारवाई करण्यात येईल