खालिद गौरी, लखनऊ (यूपी), NIT:

लोकसभा चुनाव 2019 के एलान के साथ ही मतदान तारीखों की भी घोषणा चुनाव आयोग ने कर दी है लेकिन मतदान की तीन तारीखे 6 मई 12 मई और 19 मई रमजान के महीने मे पडने की वजह से कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने मुस्लिम मतदाताओं की हमदर्दी हासिल करने के लिए इस बात पर बिना मतलब का शोर मचा रही हैं कि मुस्लिम तबका रोजा रखकर मतदान कैसे करेगा।
कानपुर से बीजेपी की युवा महिला नेत्री शाजिया तस्नम ने कांग्रेस समेत सभी विपक्षी राजनीति दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा क्या हमारे मुसलमान भाई रमज़ान में अपने ऑफिस नहीं जाते, रमज़ान में आप अपनी दुकान नहीं खोलते, क्या रमज़ान में आप अपना कारोबारी काम नहीं करते, क्या रमज़ान में आपके बच्चे स्कूल नहीं जाते? क्या मेहनतकश दिन में रोज़े की ही हालत में मज़दूरी नहीं करता? क्या मुसलमान किसान अपने खेत नहीं जाता? और पत्रकारिता के पेशे से जुडे मुसलमान रोज़े की हालत में ही दिनभर रिपोर्टिंग करते हैं और तीन सालों से रामज़ान के महीने में ही जब बोर्ड इम्तहान पड़ेंगे तो क्या आपके बच्चे एग्जाम नहीं देंगे? शाजिया तस्नम ने कहा जब हम हर ज़रूरी काम करते हैं, तो मुल्क़ के बेहतर मुस्तक़बिल के लिए अपनी अहम ज़िम्मेदारी निभाते हुए वोटिंग क्यों नहीं करेंगे? हम हिंदुस्तान के लोकतंत्र के इस त्यौहार में भी मतदान करके इस त्यौहार को मनाएंगे। रोज़े का असल इम्तेहान भी तो यही है, की रोज़े की हालत में इबादत के साथ-साथ अपने तमाम ज़रूरी काम भी किये जायें।
शाजिया तस्नम ने कहा कई एसे मौके आए जब मुसलमानों ने रमजान के महीने मे रोजा रखकर कई जंगे लड़ी हैं जिसमें जंगे बदर रमज़ान,
फतेह मक्का रमज़ान, तबूक का सफर रमज़ान, मिस्र की फतह रमज़ान, जंगे यरमूक रमज़ान, मरकाये हित्तीन रमज़ान, इसके अलावा तमाम ऐसे अहम वाकये हैं जो रमज़ान में हुए हैं।
शाजिया तस्नम सिद्दीक ने कहा मुस्लिम समाज बहकावे में न आए और बढ़-चढ़कर अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हुए मतदान करे, रमज़ान में मतदान पर मचा घमासान सिर्फ सियासत है।
मुसलमानों को चाहिये कि वह सियासतदानों के हाथ की कठपुतली न बनें और मुस्लिम समाज मतदान करने के लिए पूरी तरह तैयार रहे।
शाजिया तस्नम सिद्दीकी, बीजेपी युवा नेत्री,
कैंट विधानसभा कानपुर, उत्तर प्रदेश।
