अब्दुल वाहिद काकर, ब्यूरो चीफ, धुले (महाराष्ट्र), NIT:

2009 और 2014 लोकसभा चुनाव में यहां बीजेपी जीत दर्ज कर रही है. 2009 लोकसभा चुनाव में यहां से डॉक्टर सुभाष भामरे चुनाव जीतकर आए थे और 2009 में प्रताप नारायणराव सोनावने यहां से जीते थे। यदि 2019 में भी बीजेपी यहां से जीत दर्ज करने में सफल होती है तो यह हैट्रिक होगी.
धुले लोकसभा सीट 2019 में बीजीपी जीतती है तो होगी हैट्रिक
महाराष्ट्र के खानदेश की धुलिया लोकसभा सीट कभी कांग्रेस का गढ़ रही है, लेकिन 1996 के बाद से यहां कभी कांग्रेस जीती है तो कभी बीजेपी. फिलहाल पिछले दो बार यानि कि 2009 और 2014 लोकसभा चुनाव में यहां बीजेपी जीत दर्ज कर रही है। 2009 लोकसभा चुनाव में यहां से डॉक्टर सुभाष भामरे चुनाव जीतकर आए थे और 2009 में प्रताप नारायणराव सोनावने यहां से जीते थे। यदि 2019 में भी बीजेपी यहां से जीत दर्ज करने में सफल होती है तो यह हैट्रिक होगी।
धुले लोकसभा सीट का इतिहास…
यदि धुलिया लोकसभा सीट के इतिहास पर नजर डाली जाए तो 1957 में यहां सबसे पहला चुनाव हुआ था. यहां भारतीय जनसंघ के उत्तमराव लक्षण पाटिल जीतकर आए थे. लेकिन 1962 के चुनाव में यहां कांग्रेस ने ऐसी बाजी पलटी कि कोई दूसरा दल 35 साल तक सत्ता हासिल नहीं कर पाया.यहां चुडामन आनंदा पाटिल 1962 से 1971 तक लगातार तीन बार चुनाव जीते. इसके बाद 1977 में विजय नवल पाटिल यहां सत्ता में आए. उनके बाद 1980 में रेशमा मोतीराम भोये यहां से पहली बार कांग्रेस की टिकट पर जीतकर आई. उन्होंने 1984 और 1989 में दो चुनाव लगातार जीतकर हैट्रिक बनाई. उनके बाद 1991 में हुए लोकसभा चुनाव में यहां बापू हरी चौरे जीते.
जब टूटा कांग्रेस का 35 साल के जीत का रिकॉर्ड
धुलिया लोकसभा सीट पर 1996 का साल कांग्रेस के लिए खराब रहा. यहां बीजेपी की टिकट से साहेबराव सुकराम बगुल जीतकर लोकसभा पहुंचे. उन्होंने कांग्रेस के 35 साल लगातार जीत का रिकॉर्ड तोड़ दिया. लेकिन इसके अगले ही साल कांग्रेस ने लोकसभा प्रत्याशी बदला और डी. एस अहिरे को टिकट दिया। उन्होंने बीजेपी को पटखनी देते हुए 1998 के उपचुनाव में कांग्रेस को जीत दिलाई. यह जीत कांग्रेस को पची भी नहीं होगी कि 1999 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पासा पलट दिया और रामदास रूपला गावित चुनाव जीत गए। हालांकि, 2004 में बापू हरी चौरे यहां कांग्रेस की टिकट पर जीते और कांग्रेस की वापसी कराई।
गौरतलब है कि 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मात देते हुए बीजेपी के प्रताप नारायणराव सोनावने यहां से जीते. उनके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में सुभाष भामरे यहां से जीतकर आए।
धुले लोकसभा सीट: कभी था कांग्रेस का गढ़ अब है बीजेपी का राज
बीजेपी के दिग्गज नेता एकनाथ खड़से पर घोटाले के आरोप लगने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने धुलिया में कमान महाराष्ट्र सरकार में मंत्री गिरीश महाजन को दे रखी थी। पहले तो उन्हें इस इलाके में कमजोर समझा जा रहा था, लेकिन धुलिया में बीजेपी महानगरपालिका पर भाजपा को उन्होंने एकतरफा सफलता दिलाई। इससे लोकसभा और विधानसभा चुनाव में धुलिया सीट से बीजेपी की एक बार फिर से जीत की आस बढ़ गई है।
कांग्रेस के आसान नहीं राह, कांग्रेस का बुजुर्ग चहरा बिगड़ सकता है कांग्रेस का गणित
तीन दशक तक धुलिया तहसील विधानसभा सीट का नेतृत्व कर चुके कांग्रेस के बुजुर्ग नेता रोहिदास पाटील ने कांग्रेस सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण विभागों की मंत्री रहे हैं उनके कार्यकाल में अक्कलपाड़ा परियोजना पूरी नही हो सकी इसी तरह से उन्होंने शहर सहित ज़िले में उद्योग व्यापार कारखानों के जाल तो नहीं बिछाया लेकिन ज़िले के हर गाव में एक स्कूल बनाकर शिक्षा सम्राट के रूप मेंउभरे हैं और खान्देश की बहुप्रतीक्षित मनमाड इंदौर रेलवे मार्ग को कांग्रेस के शासनकाल में खान्देश के नेता कहने वाले रोहिदास पाटील आदि ने परियोजना को अधर में लटका रखी थी शहर में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने वाली प्रताप मील को भी राजनीतिक कारणों से बंद कराया गया इसी तरह से शहर में इंडस्ट्रीज कारखानों के लिए कोई विशेष प्रयास कांग्रेस पार्टी ने नहीं किया जिसके चलते मतदाताओं में कांग्रेस के प्रति तथा 15 वर्ष तक रोहिदास पाटिल के पिता चूड़ामन पाटील ने धुलिया लोकसभा सीट का नेतृत्व किया लेकिन उन्होंने ज़िले के विकास के प्रति आस्था नही दिखाई जिसके चलते जलगांव विकसित हो गया धुलिया जैसा कि वैसा ही मूलभूत सुविधाओं से वंचित रह गया।
