अशफाक कायमखानी, जयपुर (राजस्थान), NIT;
राजस्थान के मुस्लिम समुदाय में बालिका शिक्षा को लेकर आई बेदारी को देखते हुए अब उन्हें उच्च शिक्षा देने के लिए बालिका छात्रावास बनाने पर जोर दिया जा रहा है ताकि मुस्लिम छात्राओं के परिजन निडर हो कर अपनी बच्चियों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए बाहर भेज सकें।
राजस्थान से अब तक भारतीय सिविल सेवा में फराह हुसैन व असलम खान जैसी बेटियों के देने के साथ-साथ भारतीय आर्मी में भी जाबासर की रुखसार खान जैसी अनेक बालिकाओं के आला अधिकारी के रुप में देने वाले मुस्लिम समाज को अब बालिका शिक्षा में दिन देनी रात चौगुनी आई बेदारी को और अधिक गति देने के लिये कम से कम सम्भाग स्तर पर बालिका छात्रावास बनाने पर विचार करना ही होगा।
राजस्थान की देहाती परिवेश मे रहने वाली मुस्लिम समुदाय की सिंधी-मेव व कायमखानी बिरादरी ने मुस्लिम छात्रों के लिये प्रदेश में अनेक जगह छात्रावास बनाकर बालक शिक्षा को सालों से प्रोत्साहित करते आ रहे हैं लेकिन आज बालक शिक्षा के आंकडों को पछाड़ने को आतूर बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिये कहीं पर भी सामाजिक स्तर पर कोई भी छात्रावास संचालित नहीं होने से बालिका शिक्षा के लिये बालिकाओं को उच्च व मयारी शिक्षा के लिये बाहर भेजने के लिये उनकी सुरक्षा को लेकर अभिभावकों के मन में डर का भाव पनपने के चलते इस तरह की सुविधा ना होने से उनकी तरक्की के रास्ते मे एक रोड़ा अभी भी बना हुआ है। हालांकि जयपुर सहित कुछ जगह सरकरी स्तर पर अल्पसंख्यक बालिका छात्रावास संचालित किये जा रहे जरुर हैं लेकिन जयपुर शहर के मानसरोवर इलाके में संचालित हो रहे बालिका छात्रावास में अधिकतर राजस्थान के बाहर की लड़कियों को ही प्रवेश पता नहीं क्यों मिलता रहा है। जबकि राजस्थान के कोने-कोने से आने वाली ज्यादातर अल्पसंख्यक बालिकाओं को या तो उनके वालदेन छात्रावास में जगह न मिल पाने की शंका की हालत में जयपुर भेजने से कतराते रहते हैं या फिर हिम्मत करके जयपुर आने वाली बालिकाओं को बाहर कमरा किराये पर लेकर रहना पड़ता है। कुछेक सामाजिक संगठन तो इस तरह के सरकारी स्तर पर संचालित होने वाले बालिका छात्रावास में राजस्थान की बालिकाओं को प्राथमिकता देने की मांग भी समय-समय पर करते आ रहे हैं।
राजस्थान में सालों से बालक छात्रावास बनाकर उन्हें संचालित करने में अग्रणी भुमिका निभाने वाली कायमखानी बिरादरी ने पहले जोधपुर फिर डिडवाना व उसके बाद सीकर एवं झुंझूनु में छात्रावास सालों पहले से संचालित करके मुस्लिम सामाज के शैक्षणिक स्तर को ऊपर उठाने में अहम रोल अदा किया है। पिछले दिनों प्रशासनिक अधिकारी सत्तार खां की कोशिशो से चुरु में कायमखानी छात्रावास के लिये सरकार ने जमीन अलाट तो कर दी है। जिसमें जल्द ही विधवत छात्रावास भी संचालित होने वाला बताते हैं। इसके अतिरिक्त जयपुर के झोटवाड़ा में कुछ लोग सभी स्तर पर प्रयास व चंदा करके केजीएन छात्रावास भी बना रखा है, वहीं जयपुर के खोनागोरियान इलाके में सरकारी स्तर पर मिली जमीन पर भी चंद छात्रों के साथ एक छोटा सा छात्रावास चल रहा बताते हैं।
बालकों के लिये मुस्लिम समाज की अनेक बिरादरियों की तरफ से जगह-जगह इस तरह के छात्रावास सुविधाओं के कायम करने के बावजूद प्रदेश में कही भी किसी भी स्तर पर मुस्लिम बालिकाओं के लिये सामाजिक स्तर के सार्वजनिक छात्रावास संचालित नहीं हो रहे हैं। जबकि बालिकाएं शिक्षा क्षेत्र में बालको के मुकाबले अधिक तेजी के साथ आगे बढ कर आला मुकाम पर पहुंचने लगी हैं। प्रदेश में इस समय बालिका शिक्षा को बढावा देने में अग्रणी भुमिका अदा कर रही कायमखानी बिरादरी को जगह-जगह मुस्लिम बालिका छात्रावास खोलने पर भी विचार करना होगा।
