संदीप शुक्ला, ब्यूरो चीफ ग्वालियर (मप्र), NIT:

गोपाल किरण समाज सेवी संस्था द्वारा ग्राम खुरेरी में आगनवाड़ी केंद्र के समीप किरण महिला स्व सहायता समूह, रमाबाई स्व सहायता समूह, झलकारी बाई समूह, डिस्कशन क्लब के साथ एक संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता जहाँआरा ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रीती जोशी (महिला विशेष कक्ष) एवं मुख्य वक्ता के रूप में श्री प्रकाश सिंह निमराजे उपस्थित हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ एक प्रेणना गीत से हुआ।
श्री प्रकाश सिंह निमराजे जी ने कहा कि किसी भी देश का संविधान हो वह कानूनी रूप से एक व्यवस्था होती है इसके अंतर्गत सम्पूर्ण रूप से लोकतांत्रिक राष्ट्र का संविधान यह जनता के प्रतिनिधि निकाय द्वारा किया जाता है। संविधान पर विचार करने तथा उसे अंगीकार करने के लिए जनता द्वारा चुने गए इस प्रकार के निकाय को संविधान सभा कहा जा सकता है। भारत में संविधान की संकल्पना समता, बंधुता, न्याय पर आधारित है। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही है। भारत देश के स्वतंत्र होने के बाद समानता की नींव पड़ी थी जो जनता के हित में थी। डॉ. अम्बेडकर ने भारत देश के लिए संविधान बनाके दिया जिसके आधार पर देश की व्यवस्था चलती है। संविधान यह क़ानूनी रूप से एक किताब है लेकिन इस किताब में भारत की समस्त जनता के लिए समानता की भावना है जिसमें कोई भी ऊंच नीच नहीं है। संविधान में मनुष्य के लिए मुलभुत अधिकार, सामाजिक न्याय के तत्व कई ऐसे पहलु इस संविधान में शामिल उन्होंने कई मुद्दों पर बात कि है।
सुश्री जहाँआरा ने कहा कि जेंडर इन इक्विलिटी इंडैक्स में दुनिया के 142 देशों में भारत 125वें पायदान पर आता है जो कि बेहद ही निराशाजनक है। अमेरिकी एंबेसी में कल्चरल अफेयर के काउंसलर डॉ. केग एल डिकर का कहना था कि जेंडर वायलेंस पर सिर्फ अवेयरनेस फैलाना ही पर्याप्त नहीं होगा इसके लिए स्वयं की जिम्मेदारी लेकर मुद्दे के सभी पहलुओं पर कार्य करना होगा।मीटिग मे यह बात सामने आई कि घर-ऑफिस या बाजार में बहुत बार ऐसी हिंसा हो रही है जो जेंडर बेस्ड है लेकिन पीड़ित को खुद यह पता नहीं होता और बस वे इसे नियति मान कर ढो रहे हैं। ऐसी हिंसा को नाम देने की जरूरत है। पति पत्नी को पीटे, लेकिन पत्नी इसे नियति मानकर चुप रहती है और पति इसे अपना हक समझ लेते हैं। इप्टिजिंग (छेड़छाड़) को भी यह सोचकर नजरअंदाज कर दिया जाता है कि यह तो होता ही है, जबकि यह प्योर जेंडर बेस्ड वायलेंस है। इसी तरह “बेड टच’ भी है। जब तक जेंडर बेस्ड वायलेंस को पहचान कर व उसे नाम देकर स्पष्ट नहीं किया जाएगा तो उसका प्रतिकार भी नहीं हो सकेगा। स्टोरी टेलीग एड के अनुसार कहा गया है की एडवोकेसी सोशल चेंज लाया जा सकता है।
स्टोरी किचन की सीईओ और साउथ इंडिया एक्सपर्ट जया लुइंटेल ने कहा कि जेंडर बेस्ड वायलेंस खत्म करने के लिए सोशल एक्टिविस्ट बन ज्यादा से ज्यादा लोगों को अवेयर करना होगा। स्टोरी टेलिंग के जरिए जहां भी ऐसी हिंसा दिखे तो उसे टेक्स्ट, वीडियो या स्किट फॉर्म में लोगों के सामने लाएं। इसमें एडवोकेसी से योजनाबद्ध तरीके से टारगेट ऑडियंस तय करें। पता करें कि वायलेंस कौन कर रहा है और फिर यह जानें कि उसके मन को कैसे प्रभावित किया जा सकता है। उसके बच्चों या सॉफ्ट कॉर्नर को ढूंढ़कर उसी को टारगेट बना स्टोरी तैयार करने की जरूरत है जो समाज मे बदलाव लाने में सहायक हो सकती है।जहाँआरा जी ने यौनिकता, अधिकार, जेंडर और प्रजनन स्वास्थ्य के वैचारिक सिद्धांतों से अवगत कराया इनके सांस्कृतिक, सामाजिक और कानूनी मामलों के बीच के जुड़ाव, विश्लेषण और परस्पर सम्बन्ध के बारे में जानकारी दी ।साथी महिला घुघट व पर्दा प्रथा की बात रखी।प्रीती जोशी ने महिला हिंसा के स्वरूपो पर विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए कहा कि उनको अपने अधिकार प्राप्त करने के लिए आगे आना होगा। Self Help Groups ऐरिया में
गैर सरकारी संगठन गोपाल किरण समाज सेवी संस्था द्वारा शुरू किये गये है यह सामाजिक और आर्थिक सुधार के लिए कार्य करते हैं। स्वयं सहायता समूह का उद्देश्य-महिलाओं को सशक्तिकरण द्वारा गांव के गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य है -महिलाओं को सशक्त बनाना,गरीब लोगों के बीच नेतृत्व क्षमता का विकास करना,स्कूली शिक्षा में योगदान, पोषण में सुधार जन्म नियंत्रण, जिसमें नाबार्ड की स्वयं सहायता समूह में भूमिका प्रमुख है -कई स्वयं सहायता समूह भारत नाबार्ड की Self Help Groups Bank Linkage कार्यक्रम की तरह बैंकों से उधार लेते हैं, इस मॉडल ने अल्पसंख्यक सेवाओं को गरीब जनसंख्या तक पहुंचाने का एक संभावित कार्य किया है।
नाबार्ड का अनुमान है कि भारत में 2.2 मिलियन स्वयं सहायता समूह है, जो 33 मिलियन सदस्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं। पर विस्तार से चर्चा हुई उनको रोजगार कौशल से जोड़ने की बात हुई पुष्पा उचड़िया ने भी अपनी बात रखी कई लोगों ने विचार रखे।
