इम्तियाज चिश्ती, दमोह (मप्र), NIT:

महान सूफी हज़रत ख्वाजा अब्दुस्सलाम साहब चिश्ती का सालाना 28 वां उर्स मुबारक स्थानीय पुराना बाज़ार चिश्ती नगर में बड़ी शान व शौक़त से मनाया गया। बड़ी संख्या में दमोह और मध्यप्रदेश के अलावा अन्य प्रांतों से भी जायरीन ख्वाजा साहब के मानने वाले दमोह उर्स में पहुँचे। लगातार तीन दिनों तक चले उर्स का समापन कुल शरीफ की फातिहा से हुआ।

इस मौके पर प्रसिद्ध क़व्वाल उस्ताद सलीम झंकार ने क़व्वाली प्रोग्राम पेश किया। वही मशहूर शायर हाजी नैयर दमोही ने समापन के मौके पर देश में अमन चैन और मुल्क की तरक्की के लिए सामूहिक दुआ की। उर्स के आखरी दिन रात 9 बजे से तक़रीर प्रोग्राम हुआ जिसमें हाफिज ख़लील साहब और हाफिज तहसीन रज़ा साहब ने तक़रीर फरमाई। वहीं शायर ताबिश नैयर और शायर शफक नैय्यारी हनीफ चिश्ती ने कलाम पढ़े। इसके अलावा सारी रात उस्ताद सलीम झंकार के क़व्वालियों का दौर चला जिन्होंने सूफ़ियाना कलाम से महफ़िल में समा बांध दिया।

इम्तियाज़ चिश्ती ने जानकारी देते हुए बताया कि उर्स मुबारक में दूर दूर से जायरीन दमोह पहुँचे जिसमें ख्वाजा अब्दुस्सलाम साहब के मुरीदों की संख्या ज्यादा रही जो मध्यप्रदेश के भोपाल, कटनी, जबलपुर, होशंगाबाद, पिपरिया, पचमढ़ी, हरदा, बनखेड़ी के अलावा उत्तरप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के शहरों से अकीदतमंद लोगों ने मज़ार शरीफ पर फूल और चादर चढ़ाई और दुआएं माँगी। उर्स कमेटी अंजुमन चिश्तिया ने सभी बाहर से आये लोगों के ठहरने और उनके खाने की विवस्था की और आखिर में समापन पर कमेटी की जानिब से लंगर बांटा गया।
