100 करोड़ रुपये से अधिक का एक और शिक्षक भर्ती घोटाला उजागर, 100 से अधिक शिक्षक जांच के घेरे में, अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से 40 शिक्षकों ने दिया त्यागपत्र | New India Times

मेहलक़ा अंसारी, ब्यूरो चीफ बुरहानपुर (मप्र), NIT:

100 करोड़ रुपये से अधिक का एक और शिक्षक भर्ती घोटाला उजागर, 100 से अधिक शिक्षक जांच के घेरे में, अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से 40 शिक्षकों ने दिया त्यागपत्र | New India Times

बुरहानपुर में लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक का एक और शिक्षक घोटाला विगत दिनों उजागर हो कर समाचार पत्रों, टीवी, सोशल मीडिया के व्हाटस्एप, फेसबुक, यू ट्यूब आदि का ज़ीनत बना हुआ है। इस मामले में वर्तमान डीईओ और डीईओ कार्यालय के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत और साज़िश शामिल है। यह घोटाला वर्ष 2006 का बताया जा रहा है जिसमें 150 ऐसे व्यक्तियों को शिक्षक के रूप अपाइंटमेंट दिया गया था जो इसके योग्य नहीं थे, बावजूद इसके क़ानून क़ायदे, नियम उपनियम आदि को ताक़ पर रखकर अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से आपस में रेवड़ियां बांट कर अपने अपने रिश्तेदारों और निकट संबंधियों को न केवल अपाइंटमेंट जारी किया गया बल्कि फ़र्ज़ी हाज़री भी दर्शाकर उनके नाम से बाक़ायदा तनखा भी निकलती रही। इस मामले में डीईओ और डीईओ कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत और सांठगांठ से क़रीब 40 अपात्र शिक्षकों से त्यागपत्र दिलवाकर उन्हें बचाने के प्रयास भी विभागीय अधिकारियों द्वारा किए जा रहे हैं। इस केस में लगभग 100 शिक्षकों को शो काज़ नोटिस जारी कर के दस्तावेज़ सत्यापन के लिए 13 दिसंबर को तलब किया गया है। सब से खास बात यह है कि नियुक्ति हासिल करने वाले कुछ होशियार कर्मचारियों ने सुझ बुझ और सियासत से अन्य ज़िलों में अपना ट्रांसफर और पोस्टिंग भी करवा ली है। वहीं इस प्रकरण की जांच डीईओ कार्यालय में पदस्थ एक ईमानदार मुस्लिम अधिकारी को मिलने से विभाग में भय का वातावरण बना हुआ है। क्योंकि उस अधिकारी के बारे में कहा जाता है कि वह दुध का दुध और पानी का पानी करके रख देंगे। विभाग के अधिकारियों की कोशिश के साथ साज़िश है, कि उक्त घोटाले की जांच उक्त मुस्लिम अधिकारी को न मिलकर किसी अन्य अधिकारी को मिले ताकि निकट भविष्य में मामले को थंडा करके विभाग को क्लीन चिट मिल जाए। वहीं इस मामले के उजागर होने से और समाचार पत्रों सहित टीवी चैनल पर आने से जनता की प्रतिक्रिया यह है कि जिस तरह व्यापम की जांच सिट जैसी स्वतंत्र और उच्च स्तरीय अधिकारियों को सौंपी गई थी वैसे ही इस घोटाले की जांच भी किसी राज्य स्तरीय स्वतंत्र जांच एजेंसी को या सेवानिवृत्त जज या कलेक्टर स्तर के अधिकारी को जो बुरहानपुर के बाहर का हो और जांच को निष्पक्ष रूप से सम्पन्न करे। उसके सुपुर्द करने के आदेश मध्यप्रदेश शासन जारी करे। वैसे इस मामले में ज़िला पंचायत के वर्तमान सीईओ ने अब तक जो कार्यवाही की है वह बधाई के पात्र हैं।

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