क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस दीदी ने अपनी हार स्वीकार कर ली है? | New India Times

मेहलक़ा अंसारी, ब्यूरो चीफ बुरहानपुर (मप्र), NIT:

क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस दीदी ने अपनी हार स्वीकार कर ली है? | New India Times

28 नवंबर को हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की अर्चना चिटनिस दीदी, कांग्रेस के रवींद्र महाजन और निर्दलीय प्रत्याशी ठाकुर सुरेन्द्र सिंह शेरा भैया अपने अपने शुभचिंतकों, मित्रों, समर्थकों और पारिवारिक सदस्यों के साथ बैठकर अपने अपने गणित से अपनी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं, लेकिन बुरहानपुर के त्रिकोणीय मुक़ाबले में निर्दलीय प्रत्याशी ठाकुर सुरेन्द्र सिंह शेरा भैया के क़दम रखने से भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों को राजनैतिक रूप से नुक़सान होने का अंदेशा सियासी पंडित ज़ाहिर कर रहे हैं। स्वंय प्रत्याशी भी अपने फीडबैक से संतुष्ट नज़र नहीं आ रहे हैं और भाजपा, कांग्रेस प्रत्याशी भी दबी ज़बान में इस बात का एहसास कर रहे हैं कि जिस अंदाज़ में शेरा भैया को जन समर्थन और भीतर घातियों का समर्थन प्राप्त हुआ है, उस से उनके बाज़ी जीतने का अनुमान लगाया जा रहा है। स्वंय अर्चना चिटनिस दीदी ने विगत दिनों इस बात की घोषणा कर चुकी हैं कि वह अब अपने खेत को मुनाफ़े पर देने के बजाए स्वंय खेती किसानी करेंगी। मोहतरमा अर्चना चिटनिस दीदी के इस बयान के अपने अपने अंदाज़ में कई अर्थ और मायने निकाले जा रहे हैं। अपने अपने अंदाज़ में व्याख्या हो रही है और आम भाषा में यह माना जा रहा है कि क्या मोहतरमा ने अपनी हार स्वीकार कर ली है ? क्योंकि उनकी पार्टी के ही प्रतिद्वंद्वियों ने ही अन्य उम्मीदवारों को ताक़त पहुंचाई है, जिससे उन्हें नुक़सान होने का अंदेशा बना हुआ है। वहीं सियासी पंडितों का मानना है कि अर्चना चिटनिस दीदी के इस बयान के पीछे बहुत बड़ी सियासत और सियासी सुझबुझ छुपी हुई है। निमाड़ क्षेत्र की यह कद्दावर और शक्तिशाली नारी, जो अपने आप में लोह पुरुष जैसे हौसलों से लैस है, राजनीति जिसके खून में विरासत में मिली है, सब पर भारी है। और वह इतनी जल्दी अपनी हार मान ही नहीं सकती। स्वंय दीदी के समर्थक सोशल मीडिया के माध्यम से खुले तौर पर ऐलान कर रहे हैं कि शर्त लगाओ दीदी जीत रही है। ओनली दीदी। सियासी पंडितों की राय में अर्चना चिटनीस दीदी की नज़र आगामी लोकसभा चुनाव पर है और वह वर्तमान सांसद के स्थान पर स्वंय अपनी दावेदारी पेश करने की इच्छुक हैं।इसी लिए शतरंज की मोहरें इसी अंदाज़ में चल रही हैं। मान जा रहा है कि अगर पार्टी आलाकमान उनकी उम्मीदवारी पर मुहर नहीं लगाती है तो विकल्प के रूप में वह वर्तमान सांसद का पत्ता काटने के लिए इंदौर के कद्दावर नेता और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय जी के नाम का परचम आगे करके अपने प्रतिद्वंद्वी की काठ कर सकती हैं। कहा जाता है कि सियासत में इंकार और इक़रार अलग अलग बातें हैं। ब्यान विरोधियों के खेमे में आग फेरने के लिए दिया गया है।

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