फराज़ अंसारी, ब्यूरो चीफ बहराइच (यूपी), NIT:

शिक्षक ही समाज की आधारशिला है और एक शिक्षक ही अपने विद्यार्थी का जीवन गढ़ता है। एक शिक्षक अपने जीवन के अंत तक मार्गदर्शक की भूमिका अदा करता है और समाज को राह दिखाता रहता है, तभी शिक्षक को समाज में उच्च दर्जा दिया जाता है। माता-पिता बच्चे को जन्म देते हैं। उनका स्थान कोई नहीं ले सकता उनका कर्ज हम किसी भी रूप में नहीं उतार सकते हैं लेेकिन एक शिक्षक ही है जिसे हमारी भारतीय संस्कृति में माता-पिता के बराबर दर्जा दिया जाता है, क्योंकि शिक्षक ही हमें समाज में रहने योग्य बनाता है, इसलिए ही शिक्षक को ‘समाज का शिल्पकार’ कहा जाता है। गुरु या शिक्षक का संबंध केवल विद्यार्थी को शिक्षा देने से ही नहीं होता बल्कि वह अपने विद्यार्थी को हर मोड़ पर राह दिखाता है और उसका हाथ थामने के लिए हमेशा तैयार रहता है। विद्यार्थी के मन में उमड़े हर सवाल का जवाब देता है और विद्यार्थी को सही सुझाव देता है और जीवन में आगे बढ़ने के लिए सदा प्रेरित करता है।

डीएम माला श्रीवास्तव ने जिले के परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को प्रेरित करने के लिए उदासीन और अलग-थलग पड़ चुके सरकारी स्कूलों को प्रबुद्ध वर्ग से जोड़ा। इससे ‘शिक्षा दान, एक आदर्श दान’ की शुरुआत की। उन्होंने ‘शिक्षा की डोर, बहराइच की ओर’ नाम से शिक्षक प्रशिक्षण की एक ऐसी मुहिम चलाई। जीविका अर्थात ईश्वर प्राप्ति करना एवं इस प्रक्रिया में जो क्रिया सहायक होती थी उसे उपजीविका कहते थे। शायद इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए ही जिले की परिषदीय विद्यालयों के पठन-पाठन के स्तर को ऊपर उठाने के लिए और जिले र्सव अशिक्षा के अंधियारे को मिटाने के लिए ही डीएम माला श्रीवास्तव ने “शिक्षा दान, एक आदर्श दान” मुहिम शुरू की है। इस मुहिम के तहत उन्होंने अधिकारियों, कर्मचारियों और रिटायर्ड कर्मचारियों के साथ-साथ शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को भी इस मुहिम का हिस्सा बनाया। उनका कहना है कि विद्यादान को लेकर जिस मुहिम की उन्होंने शुरूआत की उसमें नोडल अधिकारियों का काफी योगदान रहा। जिसके चलते ही उनकी विद्यादान मुहिम इतनी सफल हो सकी है।
जिला अधिकारी माला श्रीवास्तव का कहना है कि उनका उद्देश्य यह है कि समाज के शिक्षित लोग हमारे साथ आयें और वे हमारी नई शिक्षारत पीढ़ी के साथ रूबरू होकर उनके साथ कुछ समय बितायें उन्हें पढ़ायें और सिखायें। उनका कहना है कि बहुत सारे पहलू ऐसे होते हैं जो किताबों में होते हैं और बहुत सारे ऐसे पहलू भी होते हैं जो किताबों में नहीं होते हैं। जिसे इस नई पीढ़ी के छात्र-छात्राओं को बताने और पढ़ाने की जरूरत है। उनका कहना है कि उन्होंने विभिन्न विषयों पर वालंटियर्स के रूप में रिटायर्ड कर्मचारियों, वर्तमान अधिकारी और कर्मचारियों व्यापारियों डिग्री कॉलेज इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को इस अभियान से जोड़ा। उन्होंने उनसे आग्रह किया कि वह सप्ताह में 1 दिन का समय निकालकर अपने नजदीकी प्राथमिक विद्यालय उच्च प्राथमिक विद्यालय जाएं और एक घंटे का समय बच्चों के पठन-पाठन पर खर्च करें। डीएम माला श्रीवास्तव का कहना है कि उनकी इस मुहिम में सभी ने न सिर्फ बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया बल्कि उस विद्यादान मुहिम को नया आयाम दिया। कलेक्टर साहिब की मेहनत का नतीजा ही है कि उनकी यह मुहिम कुछ ही समय मे 200 स्कूलों तक पहुंच गई जिसमें सैकड़ों वॉलिंटियर्स अब इस मुहिम से जुड़कर वियालयों में बच्चों को शिक्षित करने में अहम योगदान दे रहे हैं वहीं कलेक्टर साहिबा भी खुद समय निकाल कर परिषदीय विद्यालयों में पहुंच बच्चों की क्लास लगा रही हैं और उन्हें शिक्षित करने में अहम योगदान दे रही हैं। अपने बीच डीएम साहिबा को बतौर एक शिक्षक पाकर छात्र-छात्राओं में भी एक उत्साह दिखाई देता है और बच्चे कलेक्टर साहिबा से ज्ञान अर्जित कर रहे हैैं। वहीं इस मुहिम के बेहतर परिणाम को देख नीति आयोग ने डीएम के प्रयास की सराहना की है। नीति आयोग ने जिलाधिकारी की इस अभिनव पहल के बारे में पीएमओ को ट्वीट भी किया है।
