अधिकारीयों की मेहरबानी से जिले में धडल्ले से बिक रहा है मीठा जहर | New India Times

गणेश मौर्य, ब्यूरो चीफ अंबेडकरनगर (यूपी), NIT:

अधिकारीयों की मेहरबानी से जिले में धडल्ले से बिक रहा है मीठा जहर | New India Times

दीपावली पर्व नजदीक आते ही मार्केट में धड़ल्ले से पूरे जिले में मीठा जहर बेचा जा रहा है। मिठाई दुकानदारों के साथ साथ पॉलिथीन विक्रेता भी नकली मावा व सिंथेटिक दूध से बने मिल्क केक, डोडा, छेना ,मैदे की बर्फी, अपने दुकानों पर रख कर बेच रहे हैं जिस पर संबंधित अधिकारी मौन हैं। अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

स्वास्थ्य को लेकर सरकार भले ही बड़े-बड़े दावा करती हो लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। जिला मुख्यालय के शहर अकबरपुर, शहजादपुर में मिलावट खोरों ने स्वास्थ्य विभाग व सरकार के दावों की पोल खोल कर रख दी है। शहजादपुर सहित जिले भर में हजारों की तादाद में मिलावटी कलाकंद व अन्य मिठाइयां बनाने वाली भट्टियों का खुलेआम चलना व बाजारों में बिक रही मिलावटी मिठाइयों व मिलावट खोरों के सामने सरकार व स्वास्थ्य विभाग लाचार बेबस बौना साबित हो रहा है तथा स्वास्थ्य विभाग की खुलेआम धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। आधुनिकता की दौड़ कहो या फिर धन के लोभी, मिलावट खोर व्यक्ति आमजन के स्वास्थ्य के साथ तो खिलवाड़ कर ही रहे है लेकिन मिलावट खोर व्यक्तियों ने कलाकंद की मिठास को फीका कर दिया हैं? त्योहारी सीजन के साथ जिले भर में मिलावट खोर भी सक्रिय हो गए हैं। क्षेत्र की कई मिठाइयों की दुकानों में मिलावटी मावे की दस्तक शुरू हो गई हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से इन पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती है। जिले से लगे कई क्षेत्र में मावा की कमी को पूरा करने के लिए मिलावटी मावा इन दिनों सप्लाई किया जा रहा है। ज्यादातर मिलावटी व जहरीला मावे का गोरखधंधा जिले के अकबरपुर, सहजादपुर, मालीपुर, जलालपुर ,टांडा में चल रहा है। मिलावट खोरों से आप एक दिन के आर्डर में चाहे जितना मावा मंगवा सकते हैं, मिलावटी मावा बनाने वालों को दूध की जरूरत तो रहती नहीं है। बॉलर भट्टी पर केमिकल युक्त पाउडर फामा ऑयल से तुरंत मावा तैयार किया जा रहा है।इसके अलावा कुछ जानकारों ने बताया कि यूरिया ओर डिटर्जेंट पाउडर से तैयार सिंथेटिक दूध से भी तैयार हो रहा है। दीपावली की सीजन में यह गोरखधंधा और भी जोरों पकड़ लेता है विभागीय अधिकारी भी कार्रवाई के नाम खानापूर्ति कर लेते हैं!

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