सलमान चिश्ती, रायबरेली ( यूपी ), NIT;
उत्तर प्रदेश सरकार ने 100 नंबर की पुलिस सुविधा जनता को दी है ताकि जनता की मदद के साथ अपराध पर अंकुश लग सके लेकिन यह सुविधा रायबरेली जिले के नागरिकों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। पुलिस पर अवैध वसूली व आम लोगों के बदसलूकी के आरोप लग रहे हैं।
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक100 नंबर की गाड़ी पर चल रहे पुलिसकर्मी जनता के साथ-साथ पत्रकारों से भी बदसलूकी कर रहे हैं। ताजा मामला थाना क्षेत्र के खीरों चौराहे का है। जहां पर 100 नंबर गाड़ी 1760 खीरों चौराहे पर आरोपी पकड़ने आई थी, मुलजिम तो नहीं मिला लेकिन पत्रकारों से ही गाड़ी का ड्राइवर बदसुलूकी करने लगा। एक ओर जहां आलाधिकारियों का फरमान है कि आम जनमानस से पुलिस सामंजस्य बनाए यहां मामला बिल्कुल उलटा दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार जनता के जब से क्षेत्र में 100 नंबर गाड़ी आई है तब से लूट-खसोट बढ़ती जा रही है। आरोप है कि जगह-जगह पर 100 नंबर गाड़ी लगाकर पुलिस लोगों को डरा-धमका कर पैसा वसूलते हैं । सूत्रों की मानें तो 100 नंबर गाड़ी पुलिस की कमाई का जरिया बनता जा रहा है। कई मामले थाना क्षेत्र में ऐसे भी आए हैं कि फोन करने पर 100 नंबर गाड़ी समय से न पहुंच कर आधे से एक घंटे लेट पहुंची है। आखिर क्या कारण है की पुलिस आम जनमानस को सुरक्षा प्रदान करने के बजाय बदसलूकी करती है? पुलिस का काम तो जनता की हिफाजत करने की है ना की जनता को धौंस दिखाने की।

खबर मात्र अपना घौस जमानें के लिये पत्रकार साहब द्वारा गढी गई है।100न० जब से शुरु हुई है रोज ही लगभग150 शिकायतो पर पहुच कर समस्या का यथा संभव निस्तारण किया जा रहा है।एवं यहां तक की जिले भर में हो रहे एक्सीडेन्ट में 100न० पर सूचना पर या जनता की सूचना पर सबसे पहले घायल को अस्पताल पहुचाने का काम करती है।
यह भी उल्लेखीनीय है किं जहां तक खीराे क्षेत्र की घटना की बात है,यह स्पष्ट करना चाहूँगा किं up100 के sop में किसी मुकदमें के माल्जिम को पकडनें के लिये दबिश देनें का प्रावधान ही नही है।ना ही थाना पुलिस के साथ किसी दबिश,वारण्ट तामील,L/Oड्यूटी में जानें की भी मनाही है। एसी अवस्था में पत्रकार साहब का यह लिखना किं किसी अभियुक्त को पकडनें पुलिस आयी थी अपनें आप में ही कपोल कल्पित बात है।
और आम बात यह भी है किं कोई भी पुलिस के लिये कहे किं पुलिस वाला शराब के नशे में था,गाली दिया,मारपीट किया,पैसा लिया।तो 90प्रतिशत लोग मान लेगैं।
पर आप पत्रकार हैं।आपसे अपेक्षा समाज भी करता है किं आप दोनों पक्षों को सुन कर ही कुछ लिखेंगे,एकतरफा नही।