फराज़ अंसारी, ब्यूरो चीफ बहराइच (यूपी),NIT:

एक ओर जहां जनपद के पुलिस अधीक्षक सभाराज कानून व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त रखने का ढिंढोरा पीटते नही थके रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जिले की पुलिसिया कार्य प्रणाली लगातार मीडिया की सुर्खियां बंटोर रही हैं। अभी हाल ही में एक युवक को फ़र्ज़ी एनडीपीएस का अपराधी बनाने का जिले के एक थानाध्यक्ष का मामला सामने आया था जिसमे पुकिसिया कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में थी ही। वहीं दूसरी ओर आज एक बार फिर शहर के एकमात्र थाना दरगाह से महेज़ चंद कदमों की दूरी पर एक व्यवसायी से लूट का मामला सामने आने से पुलसिया मुस्तैदी और पुलिसिया इकबाल पर प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं। थाना दरगाह से महेज़ 50 मीटर की दूरी पर अभी महज़ डेढ़ महीने पहले ही ताला काटकर चोरो ने एक ज्वैलरी व बरतन की दूकान में रखे लाखो के माल पर हाथ साफ कर किया था जिसकी पड़ताल अभी पूरी हूई भी नहीं थी कि बीती रात एक और सनसनीखेज़ वारदात ने आमजन के दिलों को दहला दिया है। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि क्या थाना दरगाह की पुलिस का इकबाल इतना कम हो चुका है कि थाने के पास जगह ही अपराधियों के लिये सबसे ज़्यादा सॉफ्ट टारगेट है। जिले के कप्तान साहब आम तौर पर लापरवाहियां बरतने वालों पर अपनी गाज़ गिराने से ज़रा सा भी गुरेज नहीं करते हैं तो फिर एक ही थाना क्षेत्र अंतर्गत महेज़ डेढ़ महीनों के अंतराल में थाने के पास ही हूई वारदात पर उनका स्थानीय थाने की पुलिस को अभयदान दिये रहना समझ से परे है।
प्राप्त सूचना के अनुसार थाना घसियारीपुरा निवासी राजकुमार जायसवाल पुत्र उमाशंकर जायसवाल जो एक गल्फ कम्पनी के कारोबारी हैं बीते सोमवार की रात थाना दरगाह से महेज़ चंद कदमों की दूरी पर स्थित ओवरब्रिज से अपनी मोटरसाइकिल से गुज़र रहे थे कि तभी उनसे अज्ञात लुटेरों द्वारा उनके पैसों से भरा बैग लूट लिया गया। पीड़ित की मानें तो उसका आरोप है कि अपराधियों ने बंदूक की नोक के बल पर उससे बैग लूट लिया और फरार हो गये। वहीं हमारी मित्र पुलिस घटना को एक नया आयाम देने में जुट गई है। पुलिस इस लूट को महेज़ एक स्नेचिंग का केस बना रही है। पुलिस का कहना है कि कारोबारी अपनी मोटरसाइकिल से गुज़र रहक था तभी अज्ञातों द्वारा पीछे से बैग छीन कर घटना को अंजाम दिया गया है। पुलिस के अनुसार बैग पीछे से छीनने के कारण कारोबारी अपनी मोटरसाइकिल से नीचे गिर गया जिससे उसे चोटें भी आयी हैं। अब यदि पुलिस की ही मान लें तो जब पुलिस यह मानती है घटना में कारोबारी को चोटें भी आयीं तो पुलिस ने महज स्नेचिंग के तहत ही मामला पंजीकृत क्यों किया उसने व्यवसायी के मोटरसाइकिल से गिरने के कारण आयीं चोटों की बाबत मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाली धाराओं को क्यों नहीं लगाया साथ ही कारोबारी की चोटों का डॉक्टरी परीक्षण क्यों नहीं कराया। फिलहाल पुलिस ने मामले में आईपीसी की धारा 356 के तहत मुकदमा अपराध संख्या 251/18 के तहत अभियोग पंजीकृत कर लिया है और अब स्थानीय पुलिस अपराधियों को जल्द ही पकड़ने की दुहाई दे रही है। सवाल यह उठता है कि जब पुलिस थानों के आसपास हौसला बुलन्द अपराधी इन वारदातों को अंजाम देने में सफल हो जा रहे हैं और जब पुलिस थानों के पास ही आम जनता सुरक्षित नहीं है तो फिर जिले के दूर-दराज इलाकों में रहने वाली आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। ऐसा लगता है कि अपराधियों के मन पुलिसिया इकबाल का डर एकदम खत्म ही हो गया है।
थानाध्यक्ष बोले होती रहती हैं वारदातें जल्द करेंगे वर्कआउट
इस सम्बंध में जब थानाध्यक्ष महोदय थाना दरगाह से टेलिफोनिक वार्ता की गयी तो उन्होंने कहा कि वारदातें तो होती ही रहती हैं हम इसका वर्कआउट कर अपराधियों को जल्द ही सलाखों के पीछे करेंगे। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब वारदातें होती ही रहती हैं या फिर होती ही रहेंगी तो फिर स्थानीय पुलिस का क्या काम है। पुलिस का क्या सिर्फ वर्कआउट करने का हो कार्य है या अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाना भी पुलिस की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही जब हमने डेढ़ माह पहले थाने के पास ही हूई चोरी की घटना अपराधियों के पकड़े जाने के सम्बंध में उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि त्यौहार शुरू हो गए जिसमे पुलिस व्यस्त हो गयी थी जल्द ही उसका भी पर्दाफाश किया जायेगा। लेकिन पूरे मामले में सवाल ये उठता है की बहराइच के पुलिस अधीक्षक सभा राज कई मौको पर कानून व्यवस्था के चुस्त दुरुस्त होने का दावा करते रहते है लेकिन जब थाने के महज चन्द कदमों की दूरी पर वारदात को अंजाम देने में अपराधियों को मित्र पुलिस का खौफ नहीं है तो जिले का क्या हाल होगा।
