नरेंद्र इंगले, जामनेर/जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

इस महाराष्ट्र के पूरे राज्य में सुखे कि स्थिती बनी हुयी है, जनमानस की सुविधा तथा तकनिकी बिंदूओं कि माने तो अंग्रेजों द्वारा सूखे के दौरान बहाल कि गयी मुफ़िद “आनेवारी” पद्धती पर अकाल घोषित करने के बजाय सुबे के मुख्यमंत्री साइंटिफिक तरीके से उपलब्ध होने वाले डाटा के आधार पर अकाल का “अभ्यास” कर रहे हैं, यह नुस्खा सूखाग्रस्तों के लिए सरकार का नया जुमला साबित होने वाला है, ऐसा प्रहार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता संजय गरुड ने सरकार पर किया है।
तहसील NCP की ओर से आयोजित अकाल मोर्चा के दौरान अपने संबोधन मे गरुड ने केंद्र – राज्य सरकार की जमकर आलोचना करते कहा कि केंद्र के GST, नोटबंदी जैसे फ़ैसलों ने जहाँ देश कि समग्र आर्थिक व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है वहीं राज्य कि फडणवीस सरकार ने भी जुमलेबाजी, चालाकी मे मोदी जी के ही गुण आत्मसाद किए हैं। राज्य में किसानों की हालत बेहद बुरी है। बारिश के अभाव से कृषि व्यवस्था बर्बाद हो गयी है। अब तक किसानों को बोंडइल्ली कि सहायता नहीं मिल सकी है। महिलाओं पर हो रहे अत्याचार काफ़ी बढ गए हैं, कानून व्यवस्था चौपट हो गयी है। अभी तो प्रशासन में बैठे कुछ अधिकारी ही सत्ता में बैठे नेताओं की चाटूकारिता में मश्गूल हैं। केंद्र और राज्य सरकार का कामकाज इस कदर बेशर्मी से सना है कि इसे देखकर शर्म भी शर्मा जाएगी।
गरुड ने बिजली की लोडशेडिंग, फसलों की फर्जी एमएसपी, झूठी कर्जमाफ़ी, बढती महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार को खू लताडा। तत्पश्चात नेता दिगंबर पाटील ने अपने संबोधन में किसान होने के नाते कृषि व्यवस्था से जुडी जमीनी वास्तविकता पर प्रकाश डाला और सरकार से सूखा राहत प्रबंधन को तत्काल अमल में लाने कि अपील की। आंदोलन में एडवोकेट बोरसे, भगवान पाटील, किशोर पाटील, राजु पाटील, राजेंद्र चौधरी, सुनील शिंपी, प्रल्हाद धनगर, नाना पाटील, विनोद माली, पराग नेरकर, रविंद्र बंडे, माधव चव्हाण, प्रल्हाद बोरसे , प्रदीप लोढा , शैलेश पाटील , नटवर चव्हाण समेत शहर तथा तहसिल NCP इकायी के सैकडो पदाधिकारी शामिल हुए।
