अशफाक कायमखानी, जयपुर/नई दिल्ली, NIT;
चालू वर्ष पूरा होने में अभी एक तिहाई समय बाकी रहने वाले चुनावी समय में पता नही राजनीतिक दलों द्वारा कितनी दफा और भारत बंद का ऐलान किया जायेगा? लेकिन 10 सितंबर को कांग्रेस पार्टी द्वारा होने वाले भारत बंद से पहले चालू वर्ष मे दो दफा हुये भारत बंद का स्वाद बडा चटपटा कहा जा सकता है।
भारत में आसमान छूती महंगाई व आकड़ों में उछाले मारती बेरोजगारी व भ्रष्टाचार से त्रस्त होना सहित अन्य अनेक गम्भीर समस्याओं से निजात दिलाने के लिये सरकार का ध्यान आकर्षित करने से पहले कुछ वर्गों तक सीमित एससी/एसटी को सुरक्षा कवज प्रदान करने वाले सम्बंधित कानून 3-एससीएसटी पर माननीय न्यायालय द्वारा जारी एक आदेश के बाद संसोधन करके फिर से मूल कानून की स्थिति बहाल करने को लेकर दो अप्रेल को दलित संगठनों की तरफ से भारत बंद रखा गया था। उसके बाद उक्त कानून में संसोधन करने के खिलाफ 6 सितंबर को सवर्ण संगठनों द्वारा भारत बंद रखा गया था। उक्त दोनों बंद का ऐलान सामजिक संगठनों की तरफ से था जबकि 10 सितंबर को महंगाई, बेरोजगारी व व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी की तरफ से बंद का ऐलान किया गया है जिसके परीणाम आने वाले दिनों मे नजर आयेंगे।
हालांकि अन्य प्रदेशों की तरह राजस्थान प्रदेश में भी बंद को सफल बनाने के लिये कांग्रेस के शिर्ष नेताओं ने कमर कस ली है। बंद को सफल बनाने के लिये जिला व ब्लॉक स्तर पर संगठन की बैठक करके रणनीति बनाई जा चुकी है। अन्य जिलों की तरह आज सीकर में भी कांग्रेस पार्टी की बंद को सफल बनाने को लेकर अहम बैठक करके वरिष्ठ नेताओं व कार्यकर्ताओं को अलग अलग जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महिया भारत बंद को लेकर काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। वहीं झूंझनू लोकसभा क्षेत्र के फतेहपुर विधानसभा के निर्दलीय विधायक नंद किशोर जो कि कांग्रेस दल के समर्थन में काम करते हुये 10 सितंबर के भारत बंद को सफल बनाने को लेकर मुकामी कांग्रेस के साथ मिलकर रणनीति बना चुके हैं।
कुल मिलाकर यह है कि 10 सितंबर के कांग्रेस द्वारा भारत बंद करने को लेकर सफल बंद होने की पूरी उम्मीद लगाई जा रही है। फिर भी कांग्रेस के शीर्ष नेता अपने अपने क्षेत्रों में जाकर बंद को सफल बनाने की रणनीति बना चुके हैं क्योंकि अगले तीन महीने बाद राजस्थान में आम विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं।
