किसान सम्मेलन को लेकर कांग्रेस-वामपंथी आमने-सामने,  किसानों की भीड़ जुटाने को लेकर मची है होड | New India Times

अशफाक कायमखानी, जयपुर (राजस्थान), NIT; ​किसान सम्मेलन को लेकर कांग्रेस-वामपंथी आमने-सामने,  किसानों की भीड़ जुटाने को लेकर मची है होड | New India Times

राजस्थान में लाल टापू के तौर पर पहचाने जाने वाले शेखावाटी जनपद के सीकर जिले में राजस्थान सरकार द्वारा 22- सितम्बर-16 को अचानक बिजली दर में करीब साठ प्रतिशत वृद्धि करके खासतौर पर किसानों की पुरी तरह कमर टुटते देखकर स्थानीय दो दिग्गज नेताओं में इस मुद्दे को झटक कर किसानों की मांग को उजागर कर उनको राहत दिलाने के लिये किसान सम्मेलन कर उसमें भारी भीड़ जुटाने की जंग सी छिड़ी हुई है।​किसान सम्मेलन को लेकर कांग्रेस-वामपंथी आमने-सामने,  किसानों की भीड़ जुटाने को लेकर मची है होड | New India Times

सीकर में भीड़ जुटाने की कला के दो माहिर खिलाड़ी माने जाने वालों में पहले कांग्रेस नेता पुर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया व दुसरे माकपा नेता पुर्व विधायक अमराराम अपनी-अपनी पार्टी बैनर के नीचे सीकर कृषि उपज मण्डी प्रांगण जैसे एक ही स्थान पर अलग-अलग दिवस को विशाल किसान सम्मेलन करके एक दुसरे को भीड़ के आधार पर मात देने की चेष्टा करते दिखाई दे रहे हैं। पुर्व विधायक अमराराम ने बिजली दर वृद्धि सहित अनेक मांगो को लेकर सीकर मुख्यालय स्थित कृषि उपज मण्डी प्रांगण में दो फरवरी को विशाल किसान सम्मेलन करके हमेशा की तरह सरकार व कांग्रेस के कुछ नेताओं की चुल्हे हिलाकर रख दी थी। लेकिन हाल ही में कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया ने सियासी नफा-नुकसान का पुरी तरह आंकलन करके सभी कांग्रेस नेताओं को इतिहास में पहली दफा एक मत करवा करके माकपा द्वारा आयोजित सम्मैलन के ठीक बीस दिन बाद उसी जगह 22-फरवरी को कांग्रेस की तरफ से किसान सम्मेलन कराने का सभी दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में ऐहलान करके कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश का संचार करके विपक्षियों के सामने मजबूत दीवार खड़ी करके बिजली दर वृदि के मुद्दे को एक तरफा होने से काफी हद तक रोक दिया है। 

पुर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया की कार्यशैली व रिस्क मोल लेकर मंजिलें पाने की कला से हालांकि जनता पुरी तरफ से वाकिफ है। लेकिन उनके सम्मेलन करने की घोषणा के बाद दिन-रात सभी विधान सभा क्षेत्रों में कांग्रेस विधायक या जहां पुर्व विधायक हैं उनके साथ सामंजस्य बैठा कर दौरे दर दौरे करने व विभिन्न तरह की प्रचार सामग्रियों का इस्तेमाल करते हुये जगह-जगह सभाऐं करके माहौल को पुरी तरह गरम कर रख दिया है। हालात यह बन गये हैं कि कांग्रेस नेता व उनके वर्कर प्रत्येक किसान से सम्पर्क करके सीकर में 22-फरवरी को होने वाले किसान सम्मेलन में आने की अपील कर रहे हैं तो दुसरी तरफ वामपंथी दो मार्च को किसानों के जयपुर में वामपंथियों द्वारा होने वाले प्रदर्शन में भाग लेने के लिये प्रत्येक किसान से बतियाते दिखाई दे रहे हैं। हमेशा चुनावी समय के अलावा सुस्त रहने वाले कांग्रेस नेताओं व वर्करस को महरिया ने अचानक इस मुद्दे पर पुरी तरह सक्रिय करके माकपा-कांग्रेस के मध्य रणक्षेत्र का रुप दे कर जिले मे अचानक अजीब सी हलचल पैदा कर दी है।

 हालांकि सीकर जिले से चार दफा विधायक बनने वाले माकपा नेता अमराराम ने कांग्रेस दिग्गज नेता रामदेवसिंह महरिया व चौधरी नारायण सिंह को पटकनी देकर विधायक बने थे, वहीं अपने परम्परागत धोद विधान सभा के अनुसुचित जाति के लिये आरक्षित होने के बाद अपने अदना से वर्कर पेमाराम को कांग्रेस के दिग्गज नेता परशुराम मोरदिया को हराकर विधायक बना कर पुरे राजस्थान में धमाका सा करके सबको सोचने पर मजबूर कर दिया था।​किसान सम्मेलन को लेकर कांग्रेस-वामपंथी आमने-सामने,  किसानों की भीड़ जुटाने को लेकर मची है होड | New India Timesकुल मिलाकर यह है कि पुर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया ने कांग्रेस के दिग्गज नेता चौधरी नारायण सिंह, विधायक गोविंद सिंह डोटासरा, पुर्व केन्द्रीय मंत्री महादेव सिंह, परशुराम मोरदिया व दिपेन्द्र सिह सहित सभी नेताओ के साथ लगकर किसान सम्मेलन को सफल बनाने की जी तोड़ मेहनत करते दिखाई दे रहे हैं। वहीं सभी नेता अपने-अपने स्तर पर अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र से अधिकाधिक भीड़ जुटाने की कवायद में हाडतोड़ मेहनत कर रहे हैं। दुसरी तरफ पुर्व विधायक अमराराम की टीम भी पुरी तरह सक्रीय होकर दो मार्च को किसानों के जयपुर कूच में अधिकाधिक किसानों व घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को चलने की कहकर आरपार की लड़ाई लड़ने की तैयार कर रहे हैं। खास बात यह हो रही है कि सीकर में एक ही जगह एक ही मुद्दे को लेकर हो रहे अलग-अलग सम्मेलनों में कौन अधिक भीड़ जुटा पाता है, उसी तादात के अधार पर सियासी जनाधार का आंकलन तय होगा। अगर कांग्रेस के सभी दिग्गज नेता मिलकर अगामी 22-फरवरी को 2-फरवरी को हुये सम्मेलन के समान या उससे अधिक भीड़ जुटा नहीं पाये तो मानो अगले विधान सभा चुनावों में उन्हें काफी मुश्किलात का सामना करना पड़ सकता है। देखते हैं कि भीड़ जुटाने मेंनकौन एक दुसरे को पछाड़ने में कामयाब हो पाता है???

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