मकसूद अली, मुंबई, NIT;
भारत के एक प्रमुख कंज्यूमर ऑर्गनाइजेशन कंज्यूमर वॉयस द्वारा किये गये शोध में भारत में 15 राज्यों में बिक रहे 85 प्रतिशत खाद्य तेलों में मिलावट की पुष्टि हुई है। इस अध्ययन में यह भी खुलासा हुआ है कि यह तेल की 8 प्रमुख किस्मों में पाई गई है। इनमें सरसों, तिल, नारियल, सनफ्लावर, पामोलिन, सोयाबीन, मूंगफली और कॉटनसीड शामिल हैं।
ये परीक्षण नेशनल एक्रीडिएशन बोर्ड ऑफ टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज में किये गये। इस शोध कार्य के लिये महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल सहित भारत के 15 प्रमुख राज्यों से खुले खाद्य तेलों के 1,015 नमूने लिये गये थे। इन तेलों का परीक्षण एफएसएसएआइ द्वारा निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों ही मानकों के आधार पर किया गया है।
इस अध्ययन में पता चला है कि जिन नमूनों का परीक्षण किया गया, उनमें नारियल तेल में सबसे अधिक 85 प्रतिशत मिलावट पाई गई। कॉटनसीड ऑयल, तिल का तेल, सरसों तेल पर किये गये परीक्षणों के परिणाम भी बेहतर नहीं थे और इनमें क्रमश: 74.04 प्रतिशत, 74 प्रतिशत और 71.77 प्रतिशत की मिलावट मिली।
मिलावटी तेलों से सिर्फ एलर्जी और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने जैसी समस्या ही नहीं होती, बल्कि इनसे जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं, जैसे कि कैंसर, पैरालिसिस, लीवर को नुकसान और कार्डिएक अटैक (हृदयाघात)। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (बिक्री विनिमय 2011 पर निषेध एवं प्रतिबंध) ने खुले में खाद्य तेल बेचने, खरीदने और वितरित करने पर प्रतिबंध लगाया है, फिर भी देश में खुले तेल की धड़ल्ले से खरीद-फरोख्त हो रही है।
मुंबई स्थित डॉ. अपर्णा संथानम, त्वचा रोग विषेशज्ञ एवं कॉस्मेटोलॉजिस्ट ने नतीजों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा – ‘‘उपभोक्ता जिन उत्पादों का इस्तेमाल अपनी त्वचा और बालों पर करते हैं, उनके बारे में उन्हें और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। त्वचा एक सबसे अधिक संवेदनशील और महत्वपूर्ण अंग है। इन पर इस्तेमाल किये जा रहे उत्पादों में थोड़ी सी भी मिलावट त्वचा पर खुजली उत्पन्न कर सकती है और/या उसे जला सकती है।
मुंबई की डाइटीशियन एवं न्यूट्रशनिस्ट डॉ. नीति देसाई ने बताया, हमारी फूड रेगुलेटरी अथॉरिटीज ने खुले में तेल बेचने पर प्रतिबंध लगाया है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम इन पैकेट्स/पाउच का उपयोग नहीं करें क्योंकि यह तेल दूषित होता है और शरीर में टॉक्सिन जिन्हें फ्री रेडिकल्स कहा जाता है, का निर्माण करता है। यह टॉक्सिन ज्यादातर लाइफस्टाइल एवं स्थायी रोगों बढ़ावा देता है।
कंज्यूमर वॉयस के मुख्य परिचालन अधिकारी श्री अशीम सन्याल ने शोध पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा, कंज्यूमर वॉयस भारत में एक प्रमुख उपभोक्ता संगठन है। यह अन्य मंत्रालयों, नियामकीय निकायों, स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन्स, वैश्विक निकायों और पार्लियामेंट्स की स्टैंडिंग कमिटीज के अलावा उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के ‘जागो ग्राहक जागो‘ कार्यक्रम के अंतर्गत काम करता है। हम लोगों के लिये उत्पाद परीक्षणों एवं सेवाओं हेतु तुलनात्मक परीक्षण का काम भी करते हैं। ये परीक्षण ग्राहकों को जागरूक करने और वर्तमान में बाजार में उपलब्ध और खुले में बिक रहे तेलों में मौजूद मिलावट के बारे में उन्हें सतर्क करने की एक पहल है। हालांकि, इसके परिणाम कई ग्राहकों को चौंका सकते हैं, लेकिन फिर भी हमें लोगों को अधिक जागरूक बनाने के लिये उन्हें यह झटका देना जरूरी था। हमें उम्मीद है कि हमारे द्वारा किये गये परीक्षणों से उनकी आंख खुलेगी और वे अधिक जानकारी युक्त निर्णय लेने में सक्षम हो पायेंगे। हम सरकार से यह अनुरोध करना चाहेंगे कि वह खुले में इन तेलों की बिक्री पर रोक लगाये और दोषियों को सजा दें।
