कटनी जिला पंचायत अध्यक्षा पर गम्भीर आरोप: जिला पंचायत अध्यक्षा की शिकायत पर किसान आदिवासी को बे बजह परेशान कर रहा है प्रशासन | New India Times

शेरा मिश्रा/अविनाश द्विवेदी, कटनी (मप्र), NIT; ​कटनी जिला पंचायत अध्यक्षा पर गम्भीर आरोप: जिला पंचायत अध्यक्षा की शिकायत पर किसान आदिवासी को बे बजह परेशान कर रहा है प्रशासन | New India Times

कटनी जिला पंचायत अध्यक्ष की शिकायत पर प्रशासन द्वारा किसान आदिवासी को बे बजह परेशान करने कागंभीर आरोप सामने आ रहा है। अनेकों शिकायत विरोधी प्रमाण होने के पश्चात गरीब किसान को डराने धमकाने तथा मानसिक व सामाजिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप जिला पंचायत कटनी अध्यक्षा ममता पटेल पत्नी रंगलाल पटेल पर लग रहे हैं। ​कटनी जिला पंचायत अध्यक्षा पर गम्भीर आरोप: जिला पंचायत अध्यक्षा की शिकायत पर किसान आदिवासी को बे बजह परेशान कर रहा है प्रशासन | New India Timesकटनी जिला पंचायत अध्यक्षा पर गम्भीर आरोप: जिला पंचायत अध्यक्षा की शिकायत पर किसान आदिवासी को बे बजह परेशान कर रहा है प्रशासन | New India Timesकंछेदी गौड़ पिता बाला प्रसाद गौड़ उम्र लगभग 45 वर्ष बसौधा निवासी ने जिला प्रशासन के साथ साथ मध्यप्रदेश के दर्जनों आला अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों को पत्र के माध्यम से अवगत कराते हुए न्याय की गुहार लगाई तथा न्याय न मिलने की स्थिति में इच्छा मृत्यु की बात कही है। कंछेदी सिंह गौड़ का कहना है कि जिला पंचायत अध्यक्षा ममता पटेल पत्नी रंगलाल पटेल द्वारा मुझ आदिवासी के खिलाफ लगातार झूठी शिकायते करवा कर समाजिक व मानसिक रूप से अपमानित करते हैं तथा अधिकारियों पर दबाव बना कर झूठे मामलों में फंसाने का कार्य कर रहे हैं। ज्ञात हो कि कंछेदी गौड़ एक किसान है जो की अपने परिवार के पालन पोषण के लिए गांव में ही छोटी सी दुकान किए हुए है। कंछेदी का मुख्य व्यवसाय किसानी है। कंछेदी अनेकों किसानों की भूमि पर खेती करता है और कडी मशक्कत के बाद जो अनाज पाता है उसे बेच कर आने वाली फसल की तैयारी व परिवार का भारड पोषण करता है। किन्तु गरीब की महनत अमीरों को रास नहीं आ रही है। जहां मध्यप्रदेश शासन और भाजपा के मामा गरीब किसानों को बढ़ावा देने की बात करते हैं वहीं एक गरीब किसान को झुठे मामले में फंसाने का कार्य किया जा रहा है जिससे परेशान होकर किसान आज आत्मदाह की बात कह रहा है।

क्या है मामला?

कंछेदी पर 200 बोरी गेहूं तथा 50 बोरी चावल की चोरी का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने शासकीय गेहूं चावल होने की बात पर अधिकारियों को जांच करने भेजा गया। कंछेदी के घर पर जो अनाज रखा देखा गया उसमें चावल नही पाया गया बल्कि गेहूं मिला है, जबकि शिकायत मे चावल का उल्लेख किया गया था। अधिकारियों द्वारा जांच के दौरान कोई भी प्रमाण नही मिला यहां तक की कारीतलाई उचित मूल्य की दूकान पर भी अधिकारीयों ने जांच की और दर्ज रजिस्टर के अनुसार अनाज पाया गया। अधिकारियों पर बेतहाशा दबाव बनाए जाने की बजह से बिना प्रमाण के ही कंछेदी के मकान पर (अनाज की जगह) ताला ठोकना पड़ा जबकि अगर उचित मूल्य का स्टॉक दुरुस्त है तो अनाज फिर कहां है? कंछेदी के घर पर अधिकारियों की झुठी कार्यवाही से कंछेदी को समाजिक रुप से तथा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है जिसकी बजह कंछेदी गौड़ ने जिला पंचायत अध्यक्षा ममता पटेल पत्नी रंगलाल पटेल को बताया है। क्या भाजपा के नेताओं की सोच इतनी गिर सकती है कि गरीब किसान दलितों पर अपनी ताकत और पद का दुरुपयोग कर सत्ता के नशे में गरीब किसानों को ही अपना शिकार बनाएंगे। भाजपा क्या किसानों को ही अपना निवाला बनाएगी? क्या गरीबों को रौंद कर ही अमीरों के रुतबे बुलंद होंगे। प्रश्न यह उठता है कि अगर जांच में कंछेदी गौड़ के पास कुछ नहीं पाया गया तो फिर बे बजहा क्यों एक किसान को परेशान कर उसे आत्मदाह करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है? अगर किसान कि जान को कुछ हुआ तो क्या प्रशासन जबाबदार होगी या आरोप पर घिरी जिला पंचायत अध्यक्षा? जांच के पश्चात किसी पर दबाव बनाना तथा अपमानित करना गैर कानूनी माना जाता है फिर कानून के साथ खिलवाड़ क्यों?  क्या वजह सत्ता पक्ष की ताकत है?

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