ओवेस सिद्दिकी, अकोला (महाराष्ट्र), NIT;
अकोला रेलवे स्टेशन परिसर में फैली हुई गंदगी और असुविधा से यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड रहा है, जिस ओर न स्टेशन मास्टर ध्यान दे रहे हैं और न ही रेल प्रबंधक।
अकोला रेलवे स्टेशन के अनारक्षित, आरक्षित टिकट बूकींग कार्यालय परिसर में आवारा तथा खूंखार कुत्तों का जमावड़ा रहता है। परिसर में जा बजा कुत्ते शान से आराम फरमाते या झगड़ते ऩजर आते हैं और कई बार यात्रियों को वे अपना शिकार भी बनाते हैं। एक ओर भीषण गर्मी है तो दूसरी ओर स्टेशन के पंखे बंद हैं, साथ ही पेय शीतल जल हेतू कोई उचित प्रबंध नहीं किया गया है तथा पेयजल व्यवस्था सही रुप से साफ न होने के कारण पानी पूर्ण रुप से प्लेटफार्म पर आ जाता है, जिसकी वजह से कई बार यात्रियों के फिसल कर गिरने की घटनाएं देखी गई हैं।
स्टेशन पर यात्रियों को शीतल जल मुहैय्या कराने के नाम पर शीतल जल पेय व्यवस्था की गई है लेकिन इसमें से अधिकतर पूर्ण रुप से बंद है जिस कारण यात्रियों को इस ग्रीष्मकाल के मौसम में गरम पानी पीना पड़ रहा है। शीतल जल पेय व्यवस्था बंद कर निजी रुप से जल का व्यवसाय करने वाले व्यवसाइयों को बढ़ावा दिये जाने का आरोप नागरिक लगा रहे हैं। कही एैसा तो नहीं की निजी व्यवसायिक तथा स्टेशन प्रशासन की सांठ गांठ से शीतल जल पेय व्यवस्था कहीं बंद तो कहीं शुरु का ऩजारा है? स्टेशन प्रबंधक का नियंत्रण ठीक न होने का ऩजारा देखा जा सकता।
उड़ाया जा रहा स्वच्छता मिशन का म़जाक
स्टेशन परिसर में गंदगी तो है ही प्रसाधन गृह में अस्वच्छता का यह आलम है की गृह में पैर रखना भी मुश्किल है जिसकी वजह से नागरिक अन्य जगाहों में गंदगी करते ऩजर आते हैं, साथ ही पटरियों की सफाई नियमित रुप से ना किये जाने की वजह से पटरियों के करीब दुर्गंधित माहौल है। जब डीआरएम या आला अधिकारियों का निरीक्षण दौरा होता है तो उस समय स्टेशन पूर्ण रुप से साफा हो जाता है।
प्रबंधक की चुप्पी संदेह जनक
इस संदर्भ में स्टेशन प्रबंधक से संवाददाता द्वारा बार-बार संपर्क करने का प्रयास किया गया किंतु स्टेशन प्रबंधक द्वारा कोई उचित प्रतिसाद नहीं दिया गया, जिससे अनेकों प्रश्न खडे हो रहे हैं।
