2001 से संविदा पर कार्य कर रहे कर्मचारी संविदा नीति के खिलाफ बैठे हैं कई दिनों से धरने पर  | New India Times

अविनाश द्विवेदी/ इम्तियाज़ चिश्ती, दमोह- भिंड (मप्र), NIT; ​​2001 से संविदा पर कार्य कर रहे कर्मचारी संविदा नीति के खिलाफ बैठे हैं कई दिनों से धरने पर  | New India Timesमध्यप्रदेश में बीते कई दिनों से समस्त विभागों के संविदा  कर्मचारी अधिकारी और स्वस्थ कर्मचारी सहित सभी संविदा कर्मचारियों ने एक साथ प्रदेश की सरकार से नियमतिकरण की माँग  को लेकर सड़कों पर आ गए हैं। दमोह में भी यह कई दिनों से संविदा कर्मचारी धरने पर बैठे हैं। प्रदेश सरकार की वादा खिलाफी से परेशान होकर अब नाराज कर्मचारियों ने सरकार से इक्छा मृत्यु की मांग कर डाली है।

प्रदेश के ढाई लाख संविदा कर्मचारी विगतकई दिनों से सरकार से मांग कर रहे है कि उन्हें नियमियत किया जाये और जिन कर्मचारियों को निकाला गया है उन्हें पुनः वापस लिया जाये। बीते 19 सालों से लगातार संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों को अब अपना भविष्य खतरे में लग रहा है। अपनी जिंदगी के 20 साल शासन की सेवा में संविदा पर गुजार दिए अब डर है कि उम्र के इस पड़ाव में सरकार अगर नियमित नही करती है तो हम कहाँ जायेंगे। इन्हीं सब मांगों को लेकर सरकार से कई बार गुहार लगाई है। कर्मचारी अधिकारी महा संघ के पदाधिकारी सूबे के वित्त मंत्री जयंत कुमार मलैया से भी मुलाकात की बावजूद इसके शिवराज सरकार से इन्हें सिर्फ वादे मिले ,अब सरकार की वादा खिलाफी से परेशान होकर अपने आप को बेदखल मान रहे कर्मचारी इक्छा मृत्यु की मांग पर आमादा हो गये हैं। सरकार से कई मांगें रखी गई हैं लेकिन मांगें पूरी ना होने पर सभी कर्मचारी यूँ ही हड़ताल पर बैठे रहेगें । हाल ही में उत्तर प्रदेश के उप चुनाव के नतीजों ने मध्यप्रदेश सरकार की भी नींद उड़ा दी है। अगर अब यही प्रदेश के ढाई लाख  कर्मचारी शिवराज मामा से नाराज हो गए तो यहाँ भी नतीजे बिगड़ने में देर नही लगेगी।

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