Edited by Shaikh Naseem, नई दिल्ली, NIT;

राजस्थान और मध्य प्रदेश में हुए उप चुनाव के नतीजों ने जहां भाजपा को हतोत्साहित व विपक्ष को उत्साहित करने का काम किया था वही पूर्वोत्तर राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा की शानदार जीत लोगों का भ्रम तोड दिया है।
राजस्थान व मध्य प्रदेश में उपचुनाव में बीजेपी को मिली करारी हार से ये समझा जाने लगा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू ख़त्म हो गया है और जो लहर पिछले लोकसभा चुनाव में चली थी वो अब थम सी गई है, लेकिन पूवोत्तर राज्यो में अभी हुए चुनाव में ये भ्रम लोगों का टूट गया है। जो ये समझ रहे थे कि 2019 का लोकसभा चुनाव भाजपा और नरेंद्र मोदी के लिए जीतना मुश्किल है, लेकिन अभी हाल में नरेंद्र मोदी की ऐसी आंधी चली की 25 सालों से सत्ता पर जमी लेफ्ट को जड़ से उखाड़ दिया। लेफ्ट के साथ साथ भारत की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस भी इस आंधी का सामना नहीं कर पाई। लेफ्ट और कांग्रेस भाजपा की आंधी से धराशाही हो गईं हैं। अलबत्ता मेघालय में जरूर कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और कांग्रेस ने मेघालय में 21 सीटें जीती हैं। त्रिपुरा में भाजपा ने 43 सीटें जीती है। पिछले चुनाव में भाजपा को यहाँ एक भी सीट नहीं मिली थी। नागालैंड में भी भाजपा अपनी सहयोगी पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाने जा रही है।
मेघालय में त्रिशंकु सरकार बनने की उम्मीद जताई जा रही हैं। क्योंकि मेघालय में किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है।
