अरशद आब्दी, झांसी (यूपी), NIT;
झाँसी नागर में अब घर घर जाकर टीबी जैसी गम्भीर बीमारी का इलाज किया जायेगा। शनिवार से इसकी शुरुआत होने जा रही है। सरकार द्वारा चलाए गए इस अभियान के पहले चरण में महज़ 14 दिनों में ही झाँसी ज़िले में टीबी के 85 मरीज मिल गए हैं। अचानक टीबी मरीजों की संख्या बढ़ जाने से अब दूसरा चरण 24 फरवरी से शुरू किया जाने का फैसला लिया गया है । इस बार भी घर-घर जाकर टीबी के मरीजों को खोजा जाएगा।

जिला क्षय रोग केंद्र पर झाँसी नगर के सभी सम्मननिय पत्रकारों से वार्ता करते हुए अवगत कराते हुए जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. डीके गर्ग ने बताया कि 27 मार्च 2016 को प्रधानमंत्री ने भारत में टीबी को हराने का मिशन शुरू किया था और 2017-18 के बजट में 2025 तक टीबी की बीमारी खत्म करने का लक्ष्य रखा गया। इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने टीबी मुक्त उत्तर प्रदेश का आह्वान किया।

उन्होंने बताया कि पूरे देश में चार चरण में टीबी के मरीजों को खोजने का अभियान चलाया जाना है। पहले चरण में प्रदेश के छह जिलों में अभियान चलाया गया। दूसरे चरण में झाँसी सहित 25 जिलों में 26 दिसंबर से नौ जनवरी तक अभियान चला। इस दौरान 2,88,939 व्यक्तियों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें 2160 संदिग्ध क्षय रोगी पाए गए। बलगम की जांच के बाद 85 में टीबी की पहचान हुई। इनमें विकासखंड बंगरा में 13, बबीना में 11, बड़ागांव में 11, बामौर में नौ, मोंठ में सात, मऊरानीपुर में छह, गुरसरांय में छह एवं चिरगांव में पांच टीबी के मरीज शामिल हैं। इसके अलावा मेडिकल क्षेत्र में सात और महानगर के नगरीय इलाके में नौ मरीज पाए गए।
24 फरवरी से 10 मार्च तक अगला चरण चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य मुख्यालय से एक टीम यहां आकर तैयारियों का मूल्यांकन करेगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के कंसल्टेंट डॉ. विशाल अग्रवाल ने बताया कि घर घर जाकर वो ऐसे मरीजों को तलाश किया जाएगा। प्रेस कांफ्रेंस में विभाग के सभी सदस्य एवं सीनियर डॉक्टर एवं जूनियर डॉक्टर इत्यादि मौजूद रहे।
