मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, मुंबई (महाराष्ट्र), NIT:
भारत की जानी-मानी शख्सियत, प्रख्यात शिक्षाविद् एवं उद्योगपति ज़फ़र सरेशवाला ने लंदन में मौलाना ईसा मंसूरी के इंतकाल पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें एक असाधारण इस्लामी विद्वान, गंभीर चिंतक और दूरदर्शी शख्सियत बताया है। उन्होंने अपनी भावपूर्ण सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से मौलाना की इल्मी, फिक्री और बौद्धिक खूबियों को याद करते हुए कहा कि हज़रत मौलाना जैसे आला दर्जे के विद्वान आज के दौर में बहुत कम देखने को मिलते हैं।
ज़फ़र सरेशवाला ने अपनी पोस्ट में लिखा, ”इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन! एक और चिराग हमेशा के लिए बुझ गया।” उन्होंने बताया कि उन्हें लंदन में मौलाना ईसा मंसूरी की नेक सोहबत में कई घंटे बिताने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। उस मुलाकात के दौरान उन्होंने मौलाना की असाधारण बौद्धिक क्षमता, गहन अध्ययन और विचारों की गंभीरता को करीब से महसूस किया था।
उन्होंने मौलाना को समकालीन परिस्थितियों और वैश्विक घटनाक्रम की गहरी समझ रखने वाला ऐसा विद्वान बताया, जो वर्तमान मामलों का विश्लेषण कुरआन और हदीस की रोशनी में करते थे। पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत और शिक्षाओं के आलोक में उनकी विचारशीलता उन्हें विशिष्ट बनाती थी।
ज़फ़र सरेशवाला की यह श्रद्धांजलि केवल एक धार्मिक विद्वान के इंतकाल पर शोक व्यक्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस इल्मी विरासत, वैचारिक गंभीरता और दूरदर्शी नेतृत्व के महत्व को भी रेखांकित करती है, जिसकी आज के समाज को पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है।
मौलाना ईसा मंसूरी के निधन पर उनके शब्दों में झलकती आत्मीयता और उनके व्यक्तित्व के प्रति सम्मान यह दर्शाता है कि किसी विद्वान की वास्तविक पहचान केवल उसके ज्ञान से ही नहीं, बल्कि उसकी सोच, दृष्टिकोण और समाज को दिशा देने की क्षमता से भी बनती है। ऐसे विद्वानों का जाना निश्चित रूप से इल्मी और बौद्धिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
