मोहम्मद इसहाक मदनी, ब्यूरो चीफ, मैहर (मप्र), NIT:
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (एपीएस), रीवा के कुलपति राजेन्द्र कुड़रिया के खिलाफ विश्वविद्यालय के कर्मचारी लामबंद होकर धरने पर बैठ गए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि मध्य प्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय द्वारा 7 अक्टूबर 2026 को पदोन्नति के संबंध में आदेश जारी किए जाने के बावजूद कुलपति द्वारा कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ नहीं दिया जा रहा है। इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।

कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 2016 के बाद करीब दस वर्षों के लंबे अंतराल के पश्चात शासन ने पदोन्नति का रास्ता खोला है, लेकिन इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पदोन्नति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कुलपति की कार्यप्रणाली के कारण उन्हें मानसिक रूप से परेशान होना पड़ रहा है और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। साथ ही शासन के आदेश की भी अनदेखी की जा रही है।

कर्मचारियों का आरोप है कि कुलपति की मनमानी के चलते वे शासन की ओर से मिलने वाले पदोन्नति संबंधी लाभों से वंचित हो रहे हैं। इसी के विरोध में विश्वविद्यालय के कर्मचारी एकजुट होकर परिसर के अंदर ही धरने पर बैठ गए हैं। कर्मचारियों ने मांग की है कि शासन, रीवा संभाग के आयुक्त और जिला कलेक्टर इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें, ताकि लंबित पदोन्नति प्रक्रिया पूरी हो सके और कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

गौरतलब है कि इससे पूर्व भी कुलपति के खिलाफ विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा चुका है। उस दौरान छात्रों ने निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार, अनधिकृत अनुपस्थिति, शासकीय राशि के दुरुपयोग, सगे-संबंधियों को नौकरी देने तथा सगे-संबंधियों से प्रश्नपत्र तैयार करवाने और पेपर लीक होने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, ये सभी आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने हाथों में श्रीफल लेकर दंडवत करते हुए रीवा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। वहीं, प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किए जाने की भी बात सामने आई थी।
बताया जा रहा है कि कुलपति के विश्वविद्यालय में पदस्थ होने के बाद से ही समय-समय पर विभिन्न विवाद और विरोध के मामले सामने आते रहे हैं। अब कर्मचारियों के धरने पर बैठने से विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है।
