जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

मुल्क की सियासत के कद्दावर रहनुमा और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मरहूम अर्जुन सिंह की याद में आज राजधानी भोपाल में एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस मौके पर ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (अल्पसंख्यक विभाग) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी विशेष रूप से शिरकत करेंगे। इस दौरान एक भव्य मुशायरे के जरिए मरहूम अर्जुन सिंह को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया जाएगा।

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (अल्पसंख्यक विभाग) के प्रवक्ता जमशेद आलम ने इस मौके पर अर्जुन सिंह के सियासी कद और खिदमात पर रोशनी डालते हुए कहा कि वे भारतीय सियासत के उन मुनफ़रिद रहनुमाओं में शुमार थे, जिन्होंने हमेशा मुल्क के सेक्युलर ताने-बाने को मजबूत किया। आलम ने कहा कि वे दो मर्तबा देश के प्रधानमंत्री बनने के प्रबल दावेदारों में शामिल थे, लेकिन व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर उन्होंने हमेशा पार्टी के अनुशासन और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी।

1991: जब देश के सामने था गहरा राजनीतिक संकट

प्रवक्ता जमशेद आलम ने कहा कि मई 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस के सामने नेतृत्व का संकट खड़ा हो गया था। उस समय अर्जुन सिंह प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे। उनके राजनीतिक अनुभव, प्रशासनिक क्षमता और राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली नेतृत्व को देखते हुए उन्हें इस पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। हालांकि, अंततः पी.वी. नरसिम्हा राव को पार्टी का नेतृत्व सौंपा गया और अर्जुन सिंह ने पार्टी के फैसले को स्वीकार किया।

2004: सामाजिक न्याय और वफादारी की मिसाल

जमशेद आलम ने कहा कि वर्ष 2004 में यूपीए की जीत के बाद जब सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया और डॉ. मनमोहन सिंह को इस जिम्मेदारी के लिए चुना, तब भी अर्जुन सिंह का नाम संभावित दावेदारों में चर्चा में था। वे नेहरू-गांधी परिवार की विचारधारा और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के समर्थक रहे। उन्होंने पार्टी के फैसले का सम्मान किया। बाद में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह सामाजिक न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ।

भोपाल में सजेगी अदबी महफ़िल: इमरान प्रतापगढ़ी की होगी शिरकत

जमशेद आलम ने कहा कि अर्जुन सिंह हमेशा गंगा-जमुनी तहजीब, साझा विरासत और अदब-ओ-शायरी के प्रशंसक रहे। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज उनकी याद में अल्पसंख्यक विभाग की ओर से भोपाल में एक गरिमामय मुशायरे का आयोजन किया जा रहा है।

इस महफ़िल में राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी विशेष अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे और अपने खास अंदाज में मरहूम अर्जुन सिंह के व्यक्तित्व एवं उनकी सेवाओं को याद करेंगे।

आलम ने कहा कि अर्जुन सिंह भले ही प्रधानमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच सके, लेकिन पंजाब समझौते (राजीव-लोंगोवाल समझौता), धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा और पिछड़े वर्गों के हित में लिए गए उनके ऐतिहासिक फैसले उन्हें देश की सियासत में हमेशा यादगार बनाए रखेंगे।

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