गणेश मौर्य, ब्यूरो चीफ, अंबेडकर नगर (यूपी), NIT:

अकबरपुर की इंद्रलोक कॉलोनी स्थित प्राचीन एवं सरकारी अभिलेखों में दर्ज छुइया का तालाब की जमीन को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि भू-माफियाओं और राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से तालाब की भूमि की श्रेणी में बदलाव कर फर्जी खतौनी तैयार की गई और जमीन के अवैध पट्टे आवंटित कर उसे अलग-अलग लोगों में बांट दिया गया। मामले में उच्चस्तरीय जांच कराकर तालाब की भूमि को अतिक्रमण और अवैध कब्जे से मुक्त कराने की मांग उठ रही है।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, गाटा संख्या 455 के रूप में दर्ज छुइया का तालाब का कुल रकबा 4 बीघा 10 बिस्वा है। बताया जाता है कि 1359 और 1346 फसली के पुराने राजस्व अभिलेखों में भी इस भूमि का उल्लेख तालाब के रूप में स्पष्ट रूप से मिलता है। आरोप है कि मूल रूप से नॉन-जेड.ए. श्रेणी में दर्ज इस भूमि को कथित तौर पर नियमों के विपरीत जेड.ए. श्रेणी में परिवर्तित कर दिया गया। इसके बाद अभिलेखों में हेरफेर कर फर्जी खतौनी तैयार करने और जमीन के छोटे-छोटे हिस्से कर पट्टे आवंटित करने का खेल किया गया। आरोप है कि कहीं पांच-पांच बिस्वा जमीन आवंटित की गई तो कहीं अन्य लोगों को लाभ पहुंचाया गया।
इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने राजस्व अभिलेखों में कथित हेरफेर पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सार्वजनिक उपयोग की तालाब भूमि को निजी संपत्ति में बदलने की किसी भी कोशिश की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने हिंच लाल तिवारी बनाम कमला देवी मामले सहित विभिन्न फैसलों में तालाबों और अन्य सार्वजनिक उपयोग की भूमि के संरक्षण पर जोर दिया है। ऐसे में तालाब की मूल स्थिति और भूमि की श्रेणी में कथित बदलाव की वैधानिकता की जांच जरूरी बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और संबंधित उच्चाधिकारियों से मांग की है कि गाटा संख्या 455 के पुराने और वर्तमान राजस्व अभिलेखों का मिलान कराकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। यदि भूमि की श्रेणी में नियम विरुद्ध बदलाव, फर्जी खतौनी तैयार करने या अवैध पट्टे आवंटित करने की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और लाभार्थियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही अवैध पट्टों और प्रविष्टियों को नियमानुसार निरस्त कर तालाब की मूल स्थिति बहाल की जाए।
