तारिक़ खान, ब्यूरो चीफ, रायसेन (मप्र), NIT:

प्रशासनिक व्यवस्था में अक्सर आम आदमी अपनी छोटी-बड़ी समस्याओं को लेकर अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काटता नजर आता है। कई बार गंभीर बीमारी और शारीरिक परेशानी से जूझ रहे लोगों के लिए सरकारी दफ्तरों तक पहुंचना भी किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता। लेकिन रायसेन में आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने प्रशासनिक संवेदनशीलता की एक अच्छी मिसाल पेश की।
दरअसल, जनसुनवाई में एक बीमार व्यक्ति अपनी फरियाद लेकर पहुंचा था। उसकी शारीरिक स्थिति ऐसी थी कि वह चलने-फिरने में भी असमर्थ था। उसे इलाज की सख्त जरूरत थी। परिजन उसे वाहन से कलेक्ट्रेट लेकर पहुंचे थे, ताकि उसकी समस्या जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाई जा सके।
मरीज की स्थिति की जानकारी मिलते ही कलेक्टर श्री रोहित सिसोनिया ने फरियादी के अपने केबिन तक पहुंचने का इंतजार नहीं किया, बल्कि स्वयं केबिन से बाहर निकलकर वाहन के पास पहुंचे और मरीज से उसका आवेदन प्राप्त किया। कलेक्टर ने मौके पर ही उसकी परेशानी सुनी और आवेदन लेकर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
कलेक्टर का यह कदम भले ही देखने में छोटा लगे, लेकिन उस परिवार के लिए यह राहत और भरोसे का बड़ा पल था, जो अपने बीमार परिजन के इलाज की उम्मीद लेकर प्रशासन के पास पहुंचा था।
कुर्सी पर बैठकर नहीं, जनता के बीच पहुंचकर सुनी फरियाद
इस दृश्य में एक तरफ बीमारी से जूझता व्यक्ति अपनी परेशानी लेकर प्रशासन तक पहुंचा है, तो दूसरी तरफ जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी स्वयं उसके पास पहुंचकर आवेदन प्राप्त कर रहे हैं। यह दृश्य बताता है कि जनसुनवाई का वास्तविक उद्देश्य केवल आवेदन लेना नहीं, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति की परेशानी को समझना और उसके निराकरण की दिशा में प्रयास करना भी है।
अब उम्मीद है कि मरीज को जल्द मिलेगी राहत
कलेक्टर की इस संवेदनशील पहल की सराहना की जा रही है। हालांकि, अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि मरीज को समय पर बेहतर इलाज और शासन की योजनाओं का लाभ मिल पाता है या नहीं। किसी भी संवेदनशील पहल की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब जरूरतमंद व्यक्ति को उसका लाभ और राहत मिल सके।
न्यूज़ इंडिया टाइम्स की बात
किसी अधिकारी की पहचान केवल उसके पद और कुर्सी से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि वह मुश्किल में पड़े आम आदमी के प्रति कितनी संवेदनशीलता दिखाता है। रायसेन कलेक्टर की यह पहल इसी मानवीय सोच की एक सराहनीय मिसाल पेश करती है।
