वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। बाबागंज के पास स्थित ढूंसरू गांव में पेड़ों की निकासी के नाम पर कथित तौर पर भारी अनियमितता किए जाने का आरोप लगा है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के एक बड़े अधिकारी की मिलीभगत से देसी आम के पेड़ों को सरकारी अभिलेखों में कलमी आम दर्शाकर उनकी कटाई की अनुमति दिलाई गई और इसके बाद ठेकेदार ने पेड़ों पर आरा चलवा दिया।
ग्रामीणों के अनुसार, जिन पेड़ों को कलमी (ग्राफ्टेड) आम बताकर कटाई की अनुमति दी गई थी, वे वास्तव में कीमती देसी आम के पेड़ थे। आरोप है कि पेड़ों की वास्तविक पहचान छिपाकर कागजी कार्रवाई के जरिए उनकी कटाई का रास्ता साफ किया गया। इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों के साथ स्थानीय लेखपाल की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि पेड़ों की कटाई की अनुमति देने से पहले क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर उनका भौतिक सत्यापन किया था? यदि जांच की गई थी, तो देसी आम के पेड़ों को कलमी आम कैसे दर्ज कर दिया गया? ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे मामले में नियमों को ताक पर रखकर पेड़ों की कटाई कराई गई।
घटना को लेकर गांव के लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही मांग की है कि यदि जांच में वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों या ठेकेदार की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और वन विभाग के उच्चाधिकारी ग्रामीणों की शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कथित अनियमितता की जांच कर दोषियों पर क्या कार्रवाई करते हैं।
