ज़फ़र खान, अकोट/अंकोल (महाराष्ट्र), NIT:

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने गणेश साहेबराव मोरे की दोषमुक्ति के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार द्वारा दायर अपीलों को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति शिवकुमार दिगे और न्यायमूर्ति रोहित डब्ल्यू. जोशी की खंडपीठ ने 27 अक्टूबर 2026 को आपराधिक अपील क्रमांक 498/2013 एवं 499/2013 में यह फैसला सुनाया।

वाशिम के सहायक सत्र न्यायालय ने सत्र प्रकरण क्रमांक 91/2011 में 24 फरवरी 2012 को गणेश मोरे को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत लगाए गए आरोप से दोषमुक्त कर दिया था। राज्य सरकार ने निचली अदालत के इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

उच्च न्यायालय ने पाया कि शिकायतकर्ता द्वारा गणेश मोरे की हथेली पर काटने का आरोप लगाए जाने के बावजूद, घटना के दिन हुई उनकी चिकित्सकीय जांच की रिपोर्ट में किसी बाहरी चोट का उल्लेख नहीं था। न्यायालय ने यह भी पाया कि अपराध में उनकी संलिप्तता साबित करने वाली अन्य कोई ठोस सामग्री उपलब्ध नहीं थी और घटनास्थल पर उनकी मौजूदगी भी संदेहास्पद थी।

उपलब्ध साक्ष्यों और दोषमुक्ति के फैसले के खिलाफ अपीलों में हस्तक्षेप की सीमित गुंजाइश को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

सह-अभियुक्त पंजाब नाथा मोरे के निधन के कारण उनके विरुद्ध दोनों अपीलों की कार्यवाही समाप्त कर दी गई। प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता मीर नागमन अली तथा राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक एस.एस. हुलके ने पैरवी की।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version