वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

लखीमपुर के ऐतिहासिक दशहरा मेले की छठी शाम प्रदेश स्तरीय कवि सम्मेलन के नाम रही। प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए नामचीन कवियों और स्थानीय रचनाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। हास्य, व्यंग्य, गीत, गजल और ओजपूर्ण कविताओं से सजे इस आयोजन में लखनऊ की कवयित्री दिव्यांशी अवस्थी की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उनके कविता पाठ पर पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वहीं, युवा कवि संदीप कटियार ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी
लखीमपुर के ऐतिहासिक दशहरा मेले की छठी शाम प्रदेश स्तरीय कवि सम्मेलन के नाम रही। प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए नामचीन कवियों और स्थानीय रचनाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। हास्य, व्यंग्य, गीत, गजल और ओजपूर्ण कविताओं से सजे इस आयोजन में लखनऊ की कवयित्री दिव्यांशी अवस्थी की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उनके कविता पाठ पर पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वहीं, युवा कवि संदीप कटियार ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।
नगर पालिका परिषद लखीमपुर द्वारा आयोजित प्रदेश स्तरीय कवि सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि भाजपा नेता शरद बाजपेयी, रश्मि बाजपेयी, नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव तथा अधिशासी अधिकारी संजय कुमार ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम के आरंभ में स्मृतिशेष कविवर श्रद्धेय भोलानाथ शेखर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान साहित्य और काव्य जगत में उनके योगदान को याद करते हुए उनकी साहित्यिक विरासत को नमन किया गया।
उद्घाटन सत्र का संचालन साहित्यकार राममोहन गुप्त ‘अमर’ ने किया। इसके बाद सामाजिक सरोकारों और जनसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले नागरिकों को नगर पालिका परिषद की ओर से सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में सूर्य प्रकाश मिश्रा, राम किशोर श्रीवास्तव, मनीष रस्तोगी, मीना पांडिया, रियाज हबीबी, मनमीत सिंह मिंटू, रजत शेखर तथा रमन शेखर प्रमुख रूप से शामिल रहे।
इसके पश्चात विशेष शर्मा एवं कुलदीप समर के संयोजन में कवि सम्मेलन की महफिल सजी। सम्मेलन की अध्यक्षता योगेश सिंह चौहान ने की, जबकि संचालन कृष्ण कुमार मौर्य ने किया। कवियों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने वातावरण को साहित्यिक रंगों से सराबोर कर दिया। कहीं जीवन के संघर्षों की झलक दिखाई दी, तो कहीं सामाजिक विसंगतियों पर व्यंग्य के माध्यम से सवाल उठाए गए। गीतों की मधुरता, गजलों की भावप्रवणता और कविताओं की ओजस्वी अभिव्यक्ति ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। तालियों और वाहवाही के बीच काव्य सम्मेलन देर रात तक चलता रहा।
काव्य पाठ करने वाले रचनाकारों में कमलेश पाण्डेय ‘कमल’, आशीष आनंद, दिव्यांशी अवस्थी, कृति श्रीवास्तव, संजीव मिश्रा ‘व्योम’, अभिनव दीक्षित, डॉ. विजय शुक्ला ‘बादल’, मयंक मोहन दीक्षित, इंद्रपाल वर्मा, आलोक पंडित, विनीत दीक्षित ‘बागी’, अभिषेक शाश्वत, संदीप कटियार, संदीप मोहन, शशांक पांडेय, हरि बहादुर ‘हर्ष’, श्याम किशोर ‘बेचैन’, जगदीश पांडेय, करुणेश दीक्षित, मोहन लखीमपुरी, लवकुश त्रिवेदी, प्रज्ज्वल शुक्ला तथा देवी चरण मिश्रा सहित अन्य कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
कवयित्री दिव्यांशी अवस्थी के प्रभावशाली कविता पाठ से प्रभावित होकर मेजर शत्रोहन अवस्थी ने उन्हें मंच पर सम्मानित किया। उनकी प्रस्तुति पर श्रोताओं ने तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया। इसी क्रम में युवा कवि संदीप कटियार को भी उत्कृष्ट काव्य पाठ के लिए मेजर शत्रोहन अवस्थी ने माला पहनाकर सम्मानित किया। दोनों रचनाकारों के सम्मान के दौरान कार्यक्रम स्थल पर उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला।
कार्यक्रम के संयोजन मंडल में श्वेता शर्मा, निर्मला देवी, पिंकी देवी, पूजा सिंह तथा आनन्दमयी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर सुनील बाथम, राजकुमार त्रिवेदी, मेला अध्यक्ष रवींद्र रावत, मेलाधिकारी समरा सईद, सहयोगी नीलम रस्तोगी, शमीम बानो, इंजीनियर दुर्गेश वर्मा तथा सुधाकर लाला सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
लखीमपुर का ऐतिहासिक दशहरा मेला अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के साथ साहित्य और कला को मंच प्रदान करने की परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रहा है। कवि सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि कविता केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना को जागृत करने, संवेदनाओं को जीवंत रखने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ बनाने का प्रभावशाली माध्यम भी है। शब्दों की साधना, भावनाओं की अभिव्यक्ति और साहित्य के सम्मान से सजी मेले की यह शाम यादगार बन गई।
