नरेंद्र कुमार इंगले, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र में ठेकेदारों के बकाया भुगतान का मुद्दा लगातार गंभीर होता जा रहा है। ठेकेदार लॉबी के एक वर्ग का दावा है कि करीब एक लाख करोड़ रुपये के भुगतान के लिए ठेकेदार पिछले पांच वर्षों से आंदोलन कर रहे हैं। आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों के कारण ठेकेदारों के बीच भी विभाजन की स्थिति पैदा हो गई है, जिसका सबसे अधिक असर छोटे और मध्यम ठेकेदारों पर पड़ रहा है।
एक मध्यम स्तर के ठेकेदार के मुताबिक, केंद्र सरकार की बड़ी-बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के टेंडर में गुजरात की लॉबी का प्रभाव होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। उनका दावा है कि इन परियोजनाओं से जुड़े भुगतान में अपेक्षाकृत कम बाधाएं आती हैं, जबकि राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में काम पूरा करने के बावजूद छोटे ठेकेदारों को भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। कांग्रेस ने देवेंद्र फडणवीस सरकार पर 56 प्रतिशत कमीशन लेने के आरोप लगाए हैं। वहीं, सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े कुछ नेताओं का निर्माण कारोबार में हजारों करोड़ रुपये का निवेश है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
ठेकेदारों का आरोप है कि राजनीतिक हितों और प्रभावशाली कारोबारी समूहों के बीच छोटे ठेकेदारों की समस्याएं अनदेखी हो रही हैं। सरकारी विभागों में टेंडर लेकर काम पूरा करने के बाद भी भुगतान नहीं मिलने से कई ठेकेदार कर्ज और ब्याज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।
दावा किया जा रहा है कि महाराष्ट्र में भुगतान संबंधी आर्थिक संकट के चलते 13 छोटे ठेकेदार आत्महत्या कर चुके हैं। इस गंभीर दावे की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। ठेकेदारों की मांग है कि सरकार लंबित भुगतान का पारदर्शी ब्योरा सार्वजनिक करे और छोटे व मध्यम ठेकेदारों को उनका बकाया जल्द से जल्द दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए।
