त्रिवेंद्र जाट, देवरी/सागर (मप्र), NIT:

सागर जिले की देवरी तहसील के गौरझामर में कथित झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गौरझामर में संचालित दो निजी क्लीनिकों में डॉ. अश्वनी मजूमदार और डॉ. टी.के. विश्वास द्वारा मरीजों का उपचार किए जाने को लेकर लगातार समाचार प्रकाशित हो रहे हैं। इसके बावजूद संबंधित क्लीनिकों पर कार्रवाई नहीं होने से विभाग की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

सीएमएचओ के निर्देश के बाद भी कार्रवाई नहीं?

जानकारी के अनुसार, सागर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने दोनों क्लीनिकों को सील करने के निर्देश देवरी के बीएमओ को दिए जाने की बात कही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि निर्देश जारी हो चुके हैं, तो संबंधित क्लीनिकों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? मामले में बीएमओ की ओर से कार्रवाई की वर्तमान स्थिति और देरी के कारणों को स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि निरीक्षण के दौरान अन्य अस्पतालों का जायजा लिया गया, लेकिन जिन दो क्लीनिकों को लेकर लगातार शिकायतें और समाचार सामने आ रहे हैं, वहां निरीक्षण नहीं किया गया। हालांकि, इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष और निरीक्षण से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

सात दिनों से प्रकाशित हो रहे समाचार, फिर भी कार्रवाई का इंतजार

गौरझामर में दोनों क्लीनिकों को लेकर पत्रकारों द्वारा पिछले सात दिनों से लगातार समाचार प्रकाशित किए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। मध्य प्रदेश शासन और जिला प्रशासन द्वारा कथित झोलाछाप चिकित्सकों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देशों के पालन को लेकर भी जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी क्लीनिक में आवश्यक पंजीयन, चिकित्सकीय योग्यता या संचालन संबंधी नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो स्वास्थ्य विभाग को नियमानुसार जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का जोखिम न हो।

पत्रकार को धमकी देने का आरोप, थाने में दिया आवेदन

मामले में एक नया मोड़ तब आया, जब गौरझामर निवासी दैनिक विद्या वाणी समाचार पत्र के संपादक एवं पत्रकार मुकेश जैन ने आरोप लगाया कि डॉ. अश्वनी मजूमदार ने उनके साथ अभद्रता करते हुए जान से मारने की धमकी दी। पत्रकार के अनुसार, इस संबंध में उन्होंने गौरझामर थाने पहुंचकर लिखित आवेदन दिया है।

अब पुलिस द्वारा आवेदन की जांच कर आरोपों की पुष्टि करना और नियमानुसार कार्रवाई करना महत्वपूर्ण होगा। पत्रकारों की सुरक्षा तथा जनहित के मुद्दों पर स्वतंत्र रूप से समाचार प्रकाशित करने के अधिकार को लेकर भी यह मामला चर्चा में है।

कथित राजनीतिक संरक्षण की चर्चा, निष्पक्ष जांच की मांग

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी सामने आ रही है कि दोनों क्लीनिकों को कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त हो सकता है। कुछ सूत्रों द्वारा एक बड़े भाजपा नेता के सहयोग की बात भी कही जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित नेताओं या अन्य व्यक्तियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

ऐसे में बिना प्रमाण किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। यदि किसी स्तर पर राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के कारण कार्रवाई प्रभावित हो रही है, तो इसकी भी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

शासन के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की मांग

अब सवाल यह है कि जब सीएमएचओ द्वारा कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात कही जा रही है, तो उनका पालन कब होगा? क्या स्वास्थ्य विभाग दोनों क्लीनिकों का निष्पक्ष निरीक्षण कर दस्तावेजों और चिकित्सकीय योग्यता की जांच करेगा? क्या पत्रकार द्वारा दिए गए आवेदन पर पुलिस उचित कार्रवाई करेगी?

जनहित में मांग की जा रही है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मामले की निष्पक्ष जांच कराएं। जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होने पर संबंधित क्लीनिकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, पत्रकार द्वारा लगाए गए धमकी के आरोपों की पुलिस जांच करे और स्वास्थ्य विभाग अपनी कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करे, ताकि आम जनता का प्रशासन पर विश्वास बना रहे।

इनका कहना है

राजेंद्र शुक्ला, प्रभारी मंत्री, सागर:
“आपसे जानकारी मिली है। मैं सागर कलेक्टर को कार्रवाई करने के निर्देश देता हूं।”

स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारी का बयान:
“मेरे द्वारा देवरी बीएमओ को दो बार निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे वहां जाकर दोनों कथित झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करें। दोनों क्लीनिकों को सील कर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें इस संबंध में आवश्यक अधिकार भी दिए गए हैं। यदि इसके बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है, तो यह बहुत गलत बात है।”

By nit

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