हनीफ खान, ब्यूरो चीफ, मिर्ज़ापुर (यूपी), NIT:

जवाहर नवोदय विद्यालय में शनिवार को जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार की अध्यक्षता में विद्यालय प्रबंध समिति एवं विद्यालय सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। विद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस.पी. त्रिपाठी के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता, सर्वांगीण विकास और विद्यालय की आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक से पूर्व जिलाधिकारी ने विद्यालय परिसर में आयोजित कला एवं विज्ञान प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विद्यार्थियों की रचनात्मकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रतिभा की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर बैठक का शुभारंभ किया गया।
बैठक में विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए पठन-पाठन की गुणवत्ता में सुधार, विद्यार्थियों की समस्याओं के प्रभावी समाधान तथा उनके सर्वांगीण विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर बिंदुवार विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही विद्यालय की चारदीवारी, जलापूर्ति और विद्युत व्यवस्था से संबंधित समस्याओं पर भी चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने विद्यालय में बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने और आवश्यक आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने से जुड़े विषयों पर विचार किया।

विद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस.पी. त्रिपाठी के मार्गदर्शन में शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा विद्यार्थियों की प्रतिभा निखारने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। कला एवं विज्ञान प्रदर्शनी जैसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों में रचनात्मकता, नवाचार और वैज्ञानिक सोच विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
बैठक में विद्यालय प्रबंध समिति के सह-अध्यक्ष एवं उपजिलाधिकारी मड़िहान संतोष कुमार ओझा, विद्युत वितरण खंड प्रथम के अभियंता मनोज कुमार सिंह, लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता ए.के. रॉय, जिला विद्यालय निरीक्षक राजकुमार दीक्षित, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. के.के. मिश्रा, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजकुमार वर्मा, प्राचार्य बेचन सिंह, प्राचार्य उमाकांत मिश्रा, पाल्य प्रतिनिधि कमलेश मिश्रा, विद्यालय के उपप्राचार्य संजय सिंह सहित विद्यालय के अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना, उनकी समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना तथा विद्यालय की शैक्षणिक एवं आधारभूत व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाना रहा।
