त्रिवेंद्र जाट, देवरी/सागर (मप्र), NIT:

गोरझामर में कथित झोलाछाप डॉक्टरों का मामला गरमाया, कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग | New India Times

सागर जिले की देवरी तहसील के गोरझामर क्षेत्र में कथित रूप से बिना मान्य चिकित्सकीय डिग्री के मरीजों का इलाज किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर डॉ. टीके विश्वास और डॉ. मजूमदार के नाम से संचालित बताए जा रहे चिकित्सा केंद्रों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि यहां विभिन्न बीमारियों का इलाज करने के साथ मरीजों को इंजेक्शन, ड्रिप और दवाएं दी जा रही हैं। मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पत्रकारों द्वारा संबंधित व्यक्तियों से उनकी चिकित्सकीय डिग्री और योग्यता के बारे में पूछे जाने पर कथित तौर पर उन्होंने डिग्री नहीं होने की बात कही। साथ ही, उन्होंने देवरी के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) की अनुमति से अस्पताल संचालित करने और लंबे समय से मरीजों का इलाज करने का दावा किया। हालांकि, इन दावों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। संबंधित व्यक्तियों की चिकित्सकीय योग्यता, पंजीयन और चिकित्सा केंद्रों के संचालन की वैधानिक अनुमति की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

मामले में यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि मरीजों को भारी डोज के इंजेक्शन और दवाएं दी जाती हैं। ऐसे में उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी जांच आवश्यक मानी जा रही है। बिना आवश्यक योग्यता के उपचार किए जाने की पुष्टि होने पर मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
स्थानीय स्तर पर मांग की जा रही है कि देवरी बीएमओ से लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), सागर तक के अधिकारियों की निगरानी में संबंधित चिकित्सा केंद्रों की जांच कराई जाए। साथ ही, यह भी पता लगाया जाए कि पूर्व में इन केंद्रों का निरीक्षण किया गया था या नहीं। यदि निरीक्षण हुआ है, तो उसकी रिपोर्ट और की गई कार्रवाई की जानकारी भी सार्वजनिक की जाए। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की कथित मिलीभगत को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, हालांकि इसकी पुष्टि के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है।
मामले को लेकर सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल से हस्तक्षेप कर जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की जा रही है। जांच में चिकित्सकीय डिग्री, पंजीयन, अस्पताल संचालन की अनुमति, दवाओं के भंडारण और मरीजों को दिए जा रहे उपचार की पड़ताल किए जाने की मांग है। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए जरूरत के अनुसार चिकित्सा केंद्रों का संचालन बंद कराया जाए।
बताया जाता है कि कलेक्टर द्वारा पूर्व में स्वास्थ्य विभाग की बैठक में कथित झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने और अवैध रूप से संचालित अस्पतालों पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में गोरझामर का मामला इन निर्देशों के जमीनी स्तर पर पालन की स्थिति की जांच की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में कब तक जांच शुरू करता है और संबंधित चिकित्सा केंद्रों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए क्या कदम उठाता है। मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है।

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