मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, जयपुर (राजस्थान), NIT:

राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत, समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य में फिल्म निर्माण की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यदि राज्य सरकार जयपुर को फिल्म सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस पहल करे तथा प्रदेश के ऐतिहासिक स्मारकों पर फिल्म शूटिंग के लिए आवश्यक सुविधाएं और अनुमति की सरल प्रक्रिया उपलब्ध कराए, तो इससे न केवल राजस्थान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इस दिशा में राज्य सरकार से प्रभावी पहल करने की मांग उठाई गई है।
हाल ही में फिल्म निर्देशक श्री राजकिशोर सक्सेना और बैंकॉक के व्यवसायी एवं जयपुर के पूर्व वरिष्ठ पार्षद ज़ाकिर खान (जाकिर हुसैन जोहरी) के बीच हुई मुलाकात में फिल्म निर्माण, राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इस दौरान राजस्थान में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने और जयपुर को फिल्म सिटी के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
ऐतिहासिक धरोहरों को मिले फिल्म निर्माण से जुड़ने का अवसर
राजस्थान अपने ऐतिहासिक किलों, महलों, हवेलियों, धार्मिक स्थलों और विशिष्ट लोकसंस्कृति के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इन धरोहरों को फिल्मों, धारावाहिकों और अन्य दृश्य माध्यमों के जरिए व्यापक पहचान दिलाई जा सकती है। इसके लिए सरकार की ओर से शूटिंग की अनुमति, आवश्यक व्यवस्थाएं, आधारभूत सुविधाएं और फिल्म निर्माताओं को सहयोग उपलब्ध कराया जाना जरूरी है।
मांग की गई है कि राजस्थान के ऐतिहासिक स्थलों पर फिल्मांकन को प्रोत्साहित करने के लिए व्यावहारिक और सुविधाजनक व्यवस्था विकसित की जाए। इससे फिल्म निर्माता राजस्थान की ओर आकर्षित होंगे और प्रदेश की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयां मिल सकेंगी।
हाजी शकील अहमद सैफी से पहल करने का आग्रह
इस संबंध में दिल्ली की जानी-मानी राजनीतिक एवं सामाजिक शख्सियत हाजी शकील अहमद सैफी से विशेष रूप से आग्रह किया गया है कि वे राज्य और केंद्र सरकार के समक्ष इस विषय को प्रभावी ढंग से उठाएं। उनसे अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपर्कों और प्रभाव का उपयोग करते हुए जयपुर को फिल्म सिटी के रूप में विकसित करने तथा राजस्थान में फिल्म निर्माण के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में पहल करें।
स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार
जयपुर में फिल्म सिटी विकसित होने से फिल्म निर्माण से जुड़े अनेक क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। अभिनय, निर्देशन, लेखन, सिनेमैटोग्राफी, संपादन, कला निर्देशन, संगीत, वेशभूषा, तकनीकी कार्यों और अन्य सहयोगी सेवाओं में स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर मिल सकते हैं। इसके साथ ही होटल, परिवहन, खानपान और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को भी लाभ पहुंचने की संभावना है।
इस पहल से प्रदेश में फिल्म निर्माण संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ सरकार को राजस्व प्राप्त होने और राजस्थान की पर्यटन क्षमता का विस्तार होने की उम्मीद है।
कम बजट की पारिवारिक फिल्मों पर भी काम
फिल्म निर्देशक राजकिशोर सक्सेना पारिवारिक मूल्यों, सामाजिक सरोकारों और मनोरंजन को केंद्र में रखकर कम बजट की फिल्मों के निर्माण की योजना पर भी काम कर रहे हैं। उनकी प्रस्तावित फिल्मों में मां का आंचल, देवी हमारे घर आना, खुशी के आंसू और राजस्थानी परिवेश पर आधारित म्हारा गांव री छोरी शामिल हैं।
निर्देशक के अनुसार, मां का आंचल उनकी मां की स्मृति और आशीर्वाद से जुड़ा सपना है। वे वर्ष 2017 से अपनी मां की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को अपने माता-पिता के प्रति प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का संदेश देते आ रहे हैं।
उन्होंने अपनी पांच स्क्रिप्ट की पुस्तक लैंप पोस्ट में शामिल पुरानी पटकथाओं के आधार पर फिल्म निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की इच्छा जताई है। उनकी योजनाओं में पारिवारिक संबंधों, हृदय परिवर्तन, भारतीय संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और युवाओं के जीवन से जुड़े विषयों को मनोरंजक अंदाज में प्रस्तुत करना शामिल है।
निर्देशक ने बताया कि प्रस्तावित फिल्मों के लिए ऑडिशन, स्क्रीन टेस्ट, लुक टेस्ट, रिहर्सल, ब्लॉकिंग और कॉस्ट्यूम संबंधी तैयारियों के बाद शूटिंग शुरू करने की योजना है। इन फिल्मों से जुड़ने के इच्छुक नए कलाकारों, थिएटर आर्टिस्टों, गायकों, पटकथा लेखकों और कला निर्देशकों को भी अवसर देने का प्रयास किया जाएगा।
राजस्थान में फिल्म सिटी की स्थापना और ऐतिहासिक स्थलों पर शूटिंग की सुविधाएं उपलब्ध कराने की पहल प्रदेश की कला, संस्कृति, पर्यटन और स्थानीय प्रतिभाओं के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
