निहाल चौधरी, इटवा/सिद्धार्थ नगर (यूपी), NIT:
शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावों के बीच इटवा विकासखंड की ग्राम पंचायत हिंगुआ के ककरही प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर चिंताजनक है। यहां स्कूल का अपना भवन नहीं होने के कारण करीब दो साल से बच्चे मिड-डे मील (एमडीएम) शेड में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। सर्दी हो या गर्मी, बच्चों की कक्षाएं इसी सीमित स्थान पर संचालित हो रही हैं। वहीं, बारिश के दिनों में शेड की छत से पानी टपकने लगता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। जर्जर भवन को ध्वस्त किए जाने के बाद भी नए भवन का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में करीब 70 छात्र-छात्राओं की शिक्षा और सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में चिंता बनी हुई है।

जर्जर भवन ध्वस्त, लेकिन नए भवन का निर्माण शुरू नहीं
जानकारी के अनुसार, ककरही प्राथमिक विद्यालय का पुराना भवन जर्जर अवस्था में पहुंच गया था। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भवन को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई। मई 2025 में भवन की नीलामी हुई और जून 2025 में उसे ध्वस्त कर दिया गया। इसके बाद से विद्यालय की कक्षाएं एमडीएम शेड में संचालित की जा रही हैं। भवन ध्वस्त होने के बाद उम्मीद थी कि जल्द ही नए भवन का निर्माण शुरू होगा, लेकिन करीब 15 माह बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि नए भवन के लिए धनराशि की स्वीकृति अभी नहीं मिली है। इसके चलते बच्चे अब तक अस्थायी व्यवस्था में पढ़ाई कर रहे हैं।

बारिश में टपकता है पानी, सर्दी और गर्मी में भी परेशानी
विद्यालय में पढ़ाई के लिए इस्तेमाल किए जा रहे एमडीएम शेड की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने लगता है, जिससे बच्चों और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सर्दी के मौसम में खुले और सीमित संसाधनों वाले इस स्थान पर बच्चों को ठंडी हवाओं के बीच बैठना पड़ता है, जबकि गर्मी में भी पढ़ाई करना आसान नहीं रहता। पर्याप्त कक्षों के अभाव में बच्चों को व्यवस्थित तरीके से बैठाना और शिक्षण कार्य कराना शिक्षकों के लिए चुनौती बना हुआ है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल में पढ़ने का अधिकार है, लेकिन विद्यालय में लंबे समय से अस्थायी व्यवस्था बनी हुई है।

70 बच्चों के लिए पर्याप्त नहीं है एमडीएम शेड
विद्यालय में वर्तमान में करीब 70 छात्र-छात्राएं पंजीकृत बताए जा रहे हैं। इतनी संख्या में बच्चों की कक्षाएं संचालित करने के लिए एमडीएम शेड पर्याप्त नहीं है। सीमित जगह के कारण पढ़ाई-लिखाई में दिक्कत होती है। बच्चों को बैठाने से लेकर शिक्षकों के पढ़ाने तक में परेशानी आती है। विद्यालय में अलग कार्यालय की व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में शिक्षकों को शौचालय के एक हिस्से में जरूरी सामग्री रखकर उसका इस्तेमाल कार्यालय के रूप में करना पड़ता है। इससे विद्यालय की व्यवस्थाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है।
शौचालय की स्थिति भी खराब
विद्यालय में केवल भवन की समस्या ही नहीं है, बल्कि बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। परिसर में शौचालय की स्थिति भी ठीक नहीं बताई जा रही है। आवश्यक सुविधाओं की कमी के बीच बच्चों को पढ़ाई करनी पड़ रही है। अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय में सुरक्षित भवन के साथ पेयजल, साफ-सफाई और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
दूसरे गांव में पढ़ाई कराने का सुझाव, लेकिन दूरी बनी समस्या
विद्यालय का भवन ध्वस्त होने के बाद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए पास के एक अन्य प्राथमिक विद्यालय में कक्षाएं संचालित कराने का सुझाव भी दिया गया था। हालांकि, अधिकांश बच्चे दूसरे गांव में जाकर पढ़ने के लिए तैयार नहीं हुए। ऐसे में सीमित संसाधनों के बावजूद ककरही प्राथमिक विद्यालय के एमडीएम शेड में ही कक्षाएं चलती रहीं। शिक्षकों और अभिभावकों के सामने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती बनी हुई है।
अभिभावकों को नए भवन का इंतजार
अभिभावकों का कहना है कि वे लगातार विद्यालय के नए भवन की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। बच्चों को रोजाना स्कूल भेजते समय उन्हें चिंता रहती है कि कहीं कोई अप्रिय घटना न हो जाए। उनका कहना है कि शिक्षा के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है। लंबे समय तक अस्थायी व्यवस्था के सहारे विद्यालय चलाना बच्चों के हित में नहीं है।
अब सवाल यह है कि करीब 70 बच्चों को सुरक्षित विद्यालय भवन कब मिलेगा? भवन ध्वस्त होने के बाद से अस्थायी व्यवस्था में पढ़ाई कर रहे बच्चों को आखिर कब तक एमडीएम शेड में बैठकर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ेगी? जिम्मेदार विभागों को इस समस्या का शीघ्र समाधान कर बच्चों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध कराने की जरूरत है।
