नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र में भीषण सुखे के हालात के बीच नगर निगम , महानगर पालिकाएं गैर कानूनी तरीके से रेहड़ी पटरी ठेले वाले गरीबों की रोजीरोटी को हटाने पर आमादा हो गए हैं। जलगांव के बाद जामनेर में नगर परिषद की मौजूदगी में लोकल पुलिस ने नगर परिषद के अतिक्रमण उन्मूलन पथक का हिस्सा बनकर ट्रैफिक का कारण दे कर गरीबों के चलते फिरते ठेलों को सड़कों से हटाया। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि पहले दिन जामनेर पुलिस ने अतिक्रमण को अपनी प्रतिष्ठा का विषय क्यों बना लिया था ? बीजेपी के नगर सेवकों ने इस मामले में संतुलित प्रतिक्रिया दे कर दूरी बना ली है।

अतिक्रमण सीन के दौरान डकैती का एक कथित अपराध को इतिहास बनने की चर्चा दबी आवाज में सुनाई दे रही है। अतीत में अतिक्रमण को लेकर पुलिस निरीक्षक किरण शिंदे के कार्यकाल को आम जनता हिकारत से याद करती है। गोदी मीडिया गरीबों के ठेलों को अतिक्रमण बताकर खबरों को क्रिएट करता है लेकिन अमीरों के पक्के अतिक्रमण पर उसे सांप (पैसा) सूंघ जाता है।
त्योहारों के मुहाने जनता की आड़ में जनता के बड़े तबके के विरोध में चलाई जा रही रेहड़ी पटरी हटाओ मुहिम से समाज का गरीब तबका मानसिक तनाव से गुजर रहा है। असल में 2006 के बाद जामनेर में सड़क किनारे किसी प्रकार का कोई व्यावसायिक अतिक्रमण बचा हि नहीं है। BOT के नाम पर अतिक्रमण धारकों को विस्थापित कर राजनेताओं ने जिला परिषद की सारी जमीनें कॉरपोरेट्स की जेब में डाल दी है।
