30 वर्षों से गैस पीड़ितों की सेवा में सम्भावना ट्रस्ट क्लिनिक,वर्षगांठ समारोह में शामिल हुए बड़ी संख्या में लोग | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

30 वर्षों से गैस पीड़ितों की सेवा में सम्भावना ट्रस्ट क्लिनिक,वर्षगांठ समारोह में शामिल हुए बड़ी संख्या में लोग | New India Times

सम्भावना ट्रस्ट क्लिनिक की 30वीं वर्षगांठ के अवसर पर  27 सितंबर को प्रिंसेस ऑफ सी हॉल, पीपल्स मॉल, करोंद बायपास रोड, भोपाल में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिस में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री सुहासिनी मुले मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुईं। समारोह में सम्भावना क्लिनिक से इलाज प्राप्त करने वाले भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ित भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

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समारोह में क्लिनिक से जुड़े चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, कर्मचारियों, स्वयंसेवकों, गैस पीड़ितों और शुभचिंतकों ने सम्भावना की तीन दशक की यात्रा और उपलब्धियों को साझा किया।
क्लिनिक के चिकित्सक डॉ. रघुराम ने पिछले 30 वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यूनियन कार्बाइड की जहरीली गैस से हुए नुकसान के इलाज के लिए आयुर्वेद और योग को आधुनिक चिकित्सा के साथ मिलाकर उपचार के तरीके विकसित करना सम्भावना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने कहा कि सम्भावना के काम ने यह दिखाया है कि भोपाल के गैस पीड़ितों के लिए सुरक्षित, किफायती और असरदार इलाज संभव है।
क्लिनिक के डेटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर प्रेम चंद ने कम्प्यूटरीकृत चिकित्सा सूचना प्रणाली के महत्व को बताते हुए कहा कि इस प्रणाली ने अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों को एक साथ इस्तेमाल करने के साथ-साथ जहरीली गैस और प्रदूषित भूजल के दूरगामी स्वास्थ्य प्रभावों को पहचानने में भी मदद की है।

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70 हजार से अधिक लोगों को निःशुल्क इलाज

सम्भावना ट्रस्ट क्लिनिक के अनुसार, पिछले 30 वर्षों में आयुर्वेद, आधुनिक चिकित्सा और योग के माध्यम से 70 हजार से अधिक लोगों को मुफ्त इलाज दिया गया। इनमें यूनियन कार्बाइड की जहरीली गैस से प्रभावित 26,430 लोग, प्रदूषित भूजल से प्रभावित 8,152 लोग, गैस और प्रदूषित भूजल दोनों से प्रभावित 1,663 लोग तथा गैस पीड़ित माता-पिता की 231 संतानें शामिल हैं, जिन्हें लंबे समय तक निःशुल्क इलाज के लिए पंजीकृत किया गया।

1996 में 12 कर्मचारियों और 1,200 वर्गफीट जगह से शुरू हुआ यह क्लिनिक आज करीब दो एकड़ क्षेत्र में संचालित हो रहा है और इसमें 53 कर्मचारी कार्यरत हैं।

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35 हजार की आबादी में सामुदायिक स्वास्थ्य कार्य

स्वास्थ्यकर्मी कपिल दुबे और तरन्नुम खान ने बताया कि पिछले तीन दशकों में 100 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य स्वयंसेवकों की भागीदारी से करीब 35 हजार लोगों की आबादी के बीच स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता का काम किया गया। क्लिनिक के अनुसार इन प्रयासों से मलेरिया और डेंगू को खत्म करने तथा टीबी, सर्वाइकल कैंसर और एनीमिया के मामलों को कम करने में मदद मिली।

योग, पंचकर्म और आयुर्वेद पर विशेष काम

सम्भावना के अनुसार, 9,400 से अधिक लोगों को योग और प्राणायाम के माध्यम से गैर-दवा उपचार उपलब्ध कराया गया, जबकि 4,000 से अधिक लोगों का पंचकर्म की विषमुक्तिकरण विधियों के माध्यम से उपचार किया गया। क्लिनिक में आवश्यक प्रयोगशाला जांच और मेडिकल इमरजेंसी की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

क्लिनिक के परिसर में करीब 100 प्रकार के औषधीय पौधे उगाए जाते हैं। क्लिनिक के अनुसार, इनसे आयुर्वेदिक दवाओं के उत्पादन के लिए करीब 50 प्रतिशत कच्चा माल उपलब्ध होता है और 65 प्रकार की आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण किया जा रहा है।

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शोध, पर्यावरण और दस्तावेजीकरण में भी योगदान

सम्भावना ट्रस्ट के अनुसार, गैस पीड़ित माता-पिता की संतानों के स्वास्थ्य पर गैस त्रासदी के प्रभाव सहित कई विषयों पर शोध किए गए हैं और शोध पत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मेडिकल पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। यूनियन कार्बाइड हादसे और उसके बाद के हालात से जुड़े चिकित्सा, वैज्ञानिक, कानूनी, कॉरपोरेट और पीड़ितों के संघर्ष से संबंधित दस्तावेजों का संग्रह भी तैयार किया गया है।

क्लिनिक के अनुसार, एक लाख से अधिक लोगों में जहरीली गैस और प्रदूषित भूजल के दीर्घकालिक प्रभावों को समझने के लिए स्वास्थ्य सर्वेक्षण किए जा रहे हैं।

पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी पर जोर

सम्भावना क्लिनिक ने अपने परिसर को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के साथ वर्षा जल संचयन, औषधीय पौधों के बगीचे और प्राकृतिक रोशनी एवं वेंटिलेशन जैसी व्यवस्थाएं विकसित की हैं। क्लिनिक के अनुसार जैविक कचरे से संचालित बायोगैस प्लांट से ईंधन खर्च में करीब 50 प्रतिशत की कमी आई है। बायो-मेडिकल कचरे के निपटान के लिए सोलर डिसइन्फेक्शन का भी इस्तेमाल किया जाता है।

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संस्थापक न्यासी और सलाहकार सतीनाथ षड़ंगी ने सम्भावना की तीन दशक की यात्रा पर कहा कि क्लिनिक का प्रतीक चिन्ह इलाज पाने और इलाज देने वाले लोगों के बीच समानता और संबंध को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष एफसीआरए पंजीकरण की बहाली मुख्य रूप से क्लिनिक के लाभार्थियों के व्यापक समर्थन के कारण संभव हुई।

सम्भावना ट्रस्ट के अनुसार, पिछले 30 वर्षों में 36 देशों से एक हजार से अधिक स्वयंसेवकों ने क्लिनिक के काम में अपना समय और हुनर दिया। सरकारी अस्पतालों में जांच या सलाह के लिए भेजे गए मरीजों के फॉलोअप की व्यवस्था भी शुरू की गई है। क्लिनिक का दावा है कि पिछले छह वर्षों में रेफर किए गए 89 प्रतिशत लोगों को वह सुविधा मिल सकी, जिसके लिए उन्हें सरकारी अस्पताल भेजा गया था।

30वीं वर्षगांठ समारोह में गैस त्रासदी के पीड़ितों की मौजूदगी और मुख्य अतिथि सुहासिनी मुले की सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष बनाया। समारोह में सम्भावना ट्रस्ट क्लिनिक की तीन दशक की यात्रा को स्वास्थ्य सेवाओं, शोध, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी से जुड़े प्रयासों के रूप में प्रस्तुत किया गया।

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