सीतापुर जिले में बारिश से जनजीवन बेहाल, पेड़ गिरने से मार्ग अवरुद्ध; सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न | New India Times

वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

सीतापुर जिले में बारिश से जनजीवन बेहाल, पेड़ गिरने से मार्ग अवरुद्ध; सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न | New India Times

लगातार हो रही बारिश के चलते सीतापुर जिला के ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई है। कई स्थानों पर पेड़ गिरने से मार्ग अवरुद्ध हो गए, जबकि बिजली की लाइन क्षतिग्रस्त होने से विद्युत आपूर्ति भी प्रभावित हुई। वहीं नालों की सिल्ट सफाई न होने से जलनिकासी व्यवस्था चरमरा गई है। कैथी तालाब का जलस्तर बढ़ने से मधवापुर-ननौइया क्षेत्र में सैकड़ों बीघा कृषि भूमि और फसलें जलमग्न हो गई हैं। दो मकानों में पानी घुसने से ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है।
सीतापुर-मधवापुर-रामकोट मार्ग पर आरएमपी कॉलेज के पास स्थित मिलिट्री फार्म में आम का विशाल पेड़ गिर गया, जिससे मार्ग पर आवागमन बाधित हो गया। इसी तरह मधवापुर चौराहे से गद्दीपुर जाने वाले जिला पंचायत मार्ग पर भी बरगद का विशाल पेड़ गिर पड़ा। पेड़ की चपेट में आने से बिजली की लाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति प्रभावित हुई।

नाले की सफाई न होने से खेतों में भरा पानी
दारानगर-खैराबाद क्षेत्र के ग्राम मधवापुर-ननौइया में कैथी तालाब में नहर और बारिश का पानी पहुंचने से आसपास की सैकड़ों बीघा कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से नाले की सिल्ट सफाई नहीं होने के कारण पानी की निकासी बाधित है। ग्रामीणों के आरोप के अनुसार नाले को पाटकर कॉलेज निर्माण कार्य कराए जाने तथा आगे ईंट-भट्ठा संचालकों द्वारा भी नाले को पाटे जाने से जलनिकासी का मार्ग प्रभावित हुआ है।

दो मकानों में घुसा पानी, बढ़ी चिंता
लगातार बारिश और तालाब का जलस्तर बढ़ने से मधवापुर गांव की आबादी में भी जलभराव का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों के मुताबिक गांव के दो मकानों में पानी प्रवेश कर चुका है। बारिश जारी रहने और जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने पर अन्य घरों में भी पानी घुसने की आशंका है।

लाखों खर्च के बाद भी जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल
ग्रामीणों के अनुसार जिला पंचायत द्वारा निर्मित नाला अधूरा पड़ा है। तालाब के भर जाने के बाद पानी की निकासी के लिए प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से जलभराव की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि नाले के निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि नाले की नियमित सिल्ट सफाई और निर्माण कार्य समय से पूरा होने के साथ तालाब के पानी की समुचित निकासी की व्यवस्था होती तो समस्या काफी हद तक नियंत्रित की जा सकती थी।

प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कर मार्गों पर गिरे पेड़ों को हटवाने, क्षतिग्रस्त बिजली लाइन की मरम्मत कराने तथा कैथी तालाब और संबंधित नालों की सिल्ट सफाई कर जलनिकासी बहाल कराने की मांग की है। इसके अलावा नाले को पाटकर किए गए निर्माण कार्यों और अधूरे नाले के निर्माण की जांच कराने की भी मांग उठाई गई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो लगातार बारिश के कारण खेतों के साथ आबादी क्षेत्र में भी जलभराव की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version