अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल/उमरिया (मप्र), NIT:
नोरोज़ाबाद से सटे ग्राम कंचनपुर में किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसका आखिरी सफर भी ग्रामीणों के लिए किसी इम्तिहान से कम नहीं है। गांव का कब्रिस्तान नदी के दूसरी ओर स्थित होने के कारण जनाजे को करीब 4 से 5 फीट गहरे पानी से होकर नदी पार कर ले जाना पड़ता है। तेज बहाव और पानी की गहराई के बीच शव को लेकर नदी पार करना बेहद जोखिमभरा होता है।
मंगलवार को कंचनपुर के पीपल चौक के पास रहने वाले मुजीबुर्रहमान का हार्ट अटैक से निधन हो गया। बुधवार को उनके जनाजे को सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए परिजन और ग्रामीण नदी पार कर कब्रिस्तान तक पहुंचे। इस दौरान लोगों को पानी की धार के बीच से जनाजा लेकर गुजरना पड़ा।
नदी की गहराई और बहाव के कारण बड़ी संख्या में लोग चाहकर भी नदी पार नहीं कर सके और अंतिम संस्कार में शामिल होने से वंचित रह गए। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही मूलभूत सुविधा की समस्या है।
आखिरी सफर के लिए सुरक्षित रास्ता कब?
स्थानीय लोगों के मुताबिक नदी पर रपटा, पुलिया या सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की मांग कई बार प्रशासन के सामने रखी जा चुकी है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। बरसात के दिनों में समस्या और गंभीर हो जाती है और नदी का जलस्तर बढ़ने पर कब्रिस्तान तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेकर नदी पर रपटा या अन्य सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि किसी व्यक्ति के अंतिम सफर में परिजनों और ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार न करनी पड़े।
ग्रामीणों का कहना है कि मौत के बाद हर इंसान को दो गज जमीन तक सम्मानपूर्वक पहुंचने का अधिकार है, लेकिन कंचनपुर में यह अधिकार आज भी सुरक्षित रास्ते के अभाव में चुनौती बना हुआ है।
