अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

शहर की ऐतिहासिक धरोहरों को संवारने एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के दावों के बीच ऐतिहासिक मोतिया तालाब और बेनज़ीर पैलेस के सामने बने फुटपाथ की बदहाल स्थिति ने व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों रुपये की लागत से तैयार किए गए फुटपाथ का कई हिस्सा धंसता जा रहा है। वहीं तालाब किनारे सुरक्षा के लिए लगाई गई जालियां भी कई स्थानों से गायब हैं और पर्याप्त रोशनी के अभाव में शाम होते ही क्षेत्र अंधेरे में डूब जाता है।

मध्यप्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच के सचिव हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए संबंधित विभाग से तत्काल मौके का निरीक्षण कराने और आवश्यक मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग की है।
हाजी इमरान हारून ने कहा कि किसी ऐतिहासिक और हेरिटेज स्थल के विकास पर जनता का लाखों रुपये खर्च होने के बाद उसके रखरखाव की जिम्मेदारी भी उतनी ही गंभीरता से निभाई जानी चाहिए। मोतिया तालाब के फुटपाथ की वर्तमान स्थिति से ऐसा प्रतीत होता है कि निर्माण के बाद नियमित रखरखाव और निगरानी पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि मामला केवल सरकारी धन के उचित उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। फुटपाथ का धंसना, सुरक्षा जालियों का गायब होना और पर्याप्त लाइटिंग नहीं होना हादसे की आशंका बढ़ाता है।

उन्होंने मांग की कि मोतिया तालाब और बेनज़ीर पैलेस के सामने बने पूरे फुटपाथ का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। धंसे हुए हिस्सों की गुणवत्ता के साथ जांच कर स्थायी मरम्मत की जाए, क्षतिग्रस्त एवं गायब सुरक्षा जालियां दोबारा लगाई जाएं तथा पूरे क्षेत्र में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
हाजी इमरान हारून ने कहा कि भोपाल के ऐतिहासिक और हेरिटेज स्थलों को विकसित करने तथा हेरिटेज वॉक जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की बातें लगातार सामने आती हैं, लेकिन इन योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण, सौंदर्यीकरण और रखरखाव जमीन पर भी दिखाई दे।

उन्होंने कहा कि सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित ऐतिहासिक स्थलों के माध्यम से भोपाल में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को शहर की समृद्ध विरासत से जोड़ा जा सकता है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने कहा कि भोपाल की ऐतिहासिक धरोहरें शहर की पहचान हैं। इनके संरक्षण और सुरक्षा को केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित न रखते हुए नियमित निरीक्षण और रखरखाव की ठोस व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन धरोहरों को सुरक्षित और व्यवस्थित रूप में देख सकें।
