मुबारक अली, ब्यूरो चीफ, शाहजहांपुर (यूपी), NIT:
उत्तर प्रदेश दीवानी न्यायालय कर्मचारी संघ ने वर्षों से लंबित विभिन्न मांगों के निस्तारण को लेकर प्रदेश सरकार का ध्यान आकर्षित कराया है। संघ के पदाधिकारियों ने विधायक एवं प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना को रविवार को ज्ञापन सौंपकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक अपनी मांगें पहुंचाने का आग्रह किया।
संघ के कार्यवाहक कोषाध्यक्ष अनिल कुमार और कार्यवाहक उपाध्यक्ष राजीव यादव ने बताया कि संघ की बैठकों में न्यायालय कर्मचारियों से जुड़े लंबित विषयों पर चर्चा के बाद शासन के समक्ष छह प्रमुख मांगें रखी गई हैं।
इनमें एफटीसी एवं स्पेशल न्यायालयों के कर्मचारियों के वेतन में उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत वृद्धि करने और सेवा नियमावली बनाए जाने, पेड-अप्रेंटिस कर्मचारियों को कनिष्ठ सहायक पदों पर समायोजित करने के लिए नियमावली में संशोधन तथा पदोन्नति की सेवा शर्तों में शिथिलीकरण की मांग शामिल है।
इसके अलावा जनपद न्यायालयों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का लुप्त पद पुनः सृजित करने, ग्रेड वेतन 4600 वाले लिपिकीय पदों को राजपत्रित दर्जा देने तथा न्यायालय कर्मचारियों के मकान किराया भत्ते का पुनरीक्षण करने की मांग की गई है।
संघ ने लिपिकवर्गीय कार्मिकों की शैक्षणिक योग्यता स्नातक किए जाने, पदोन्नति के लिए अतिरिक्त पद सृजित करने तथा वंशान लेखन के लिए नियमित पद सृजित करने सहित अन्य मांगें भी उठाई हैं।
संघ ने मांगों के निस्तारण के लिए चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। 2 अक्टूबर को प्रत्येक जनपद में तिरंगा यात्रा, 10 अक्टूबर को मुख्यमंत्री एवं उच्च न्यायालय को पत्र भेजकर लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय की मांग तथा 25 अक्टूबर को लखनऊ में सत्याग्रह करने की चेतावनी दी गई है।
संघ पदाधिकारियों ने सरकार से मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेते हुए कर्मचारियों के हित में आवश्यक कार्रवाई किए जाने की अपील की है।
