चार साल से चार्ज पर एडीओ पंचायत की कुर्सी, 53 ग्राम पंचायतों की व्यवस्था पर उठे सवाल | New India TimesOplus_131072

मुराद खान, लालगंज/मिर्ज़ापुर (यूपी), NIT:

चार साल से चार्ज पर एडीओ पंचायत की कुर्सी, 53 ग्राम पंचायतों की व्यवस्था पर उठे सवाल | New India Times

मिर्जापुर जिले के लालगंज विकासखंड में एडीओ पंचायत के पद पर लंबे समय से चल रही अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव अजय शंकर करीब चार वर्षों से एडीओ पंचायत का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। उनके पास सचिव पद की जिम्मेदारियों के साथ दो क्लस्टर का दायित्व होने की भी चर्चा है। ऐसे में 53 ग्राम पंचायतों की निगरानी और विकास कार्यों की प्रभावी समीक्षा को लेकर ग्रामीणों ने सवाल खड़े किए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि एडीओ पंचायत का पद ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के पास अतिरिक्त प्रभार रहने से प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों ने संबंधित उच्च अधिकारियों से इस व्यवस्था की समीक्षा कराने की मांग की है।
वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर भी शिकायतों और आरोपों की चर्चा है। प्रधानमंत्री सुलभ शौचालय सहित ग्रामीण विकास योजनाओं में पात्र लाभार्थियों के चयन, भुगतान और कार्यों की गुणवत्ता को लेकर जांच की मांग उठाई जा रही है। कुछ ग्रामीणों ने योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर कथित कमीशनखोरी के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करे और यदि किसी स्तर पर अनियमितता या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
लालगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी ग्रामीणों ने समस्याएं गिनाई हैं। उनका कहना है कि सरकार की ओर से ग्राम पंचायतों के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से धनराशि उपलब्ध कराई जाती है, ऐसे में विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति और खर्च की गई धनराशि का सार्वजनिक हिसाब होना चाहिए।
ग्रामीणों ने पिछले चार वर्षों के दौरान 53 ग्राम पंचायतों में स्वीकृत विकास कार्यों, कार्यादेश, भुगतान, मस्टर रोल, सामग्री खरीद, लाभार्थी चयन और योजनाओं के क्रियान्वयन की बिंदुवार जांच तथा स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल संबंधित विभागीय अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था को लेकर है। उनका कहना है कि यदि लंबे समय से अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था चल रही है और एक कर्मचारी के पास कई जिम्मेदारियां हैं, तो इसकी नियमित समीक्षा क्यों नहीं की गई। ग्रामीणों ने जिला पंचायत राज विभाग, खंड विकास अधिकारी और अन्य सक्षम अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि मामला किसी एक कर्मचारी के चार्ज तक सीमित नहीं है, बल्कि 53 ग्राम पंचायतों के विकास, सरकारी धन की पारदर्शिता और पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचने से जुड़ा है। निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए जा रहे आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किसकी बनती है।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version