नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

2024-25 की सहायता अभी तक किसानों को नहीं मिली है मेरा तो अब सरकारी सहायता पर भरोसा नहीं रहा है लेकिन फिर भी विपक्ष के नाते हम सरकार से मांग करते हैं कि जामनेर ब्लॉक में सुखा घोषित किया जाए। एनसीपी शरदचन्द्र पवार की ओर से नेता दिलीप खोड़पे ने राजस्व विभाग को ज्ञापन दे कर किसानों की पीड़ा की ओर सरकार का ध्यान खींचने का प्रयास किया। खोड़पे ने कहा जामनेर ब्लॉक की आनेवारी 50 पैसे से कम आंककर तत्काल प्रभाव से सूखे का ऐलान कर किसानों को मदद होनी चाहिए।

गोपाल राजपूत , भास्कर शंकर पाटील , अर्जुन पाटील , दत्तू नेरकर समेत सैकड़ों कार्यकर्ता किसान मौजूद रहे। न्यू इंडिया टाइम्स ने ब्लॉक में सामरोद शंकरपुरा फत्तेपुर इलाके में फसलों का जायज़ा लिया जिसमें पता चला कि बारिश के अभाव से कपास पर मावा – चिकटा का संक्रमण हो चुका है। मकई के भुट्टे की धारण क्षमता ख़त्म हो गई है। घरेलू उपभोग के लिए बोई गई उड़द- मूंग की पैदावार कम हो चुकी है। खरीप की फसले बचने की कोई उम्मीद नहीं है। अगर वापसी में मानसून की बारिश नहीं हुई तो पानी के अभाव से किसान रबी की गेहूं चना जैसी फ़सल नहीं बो सकते।
Gen Z को जोड़ने की चुनौती :
महाराष्ट्र में 1995 के बाद किसानों के लिए आक्रामक आंदोलन करती आई बीजेपी इन्हीं आंदोलनों के बूते बीते 12 साल से सत्ता में है। कपास आंदोलन को गलती मान चुके गिरीश महाजन मंत्री बने बैठे हैं। ईश्वर बाबूजी के नेतृत्व से लेकर आज दिलीप खोड़पे तक के बत्तीस साल के कार्यकाल में गिरीश महाजन के विरोध में लड़ रहा विपक्ष केवल महाजन के विरोधी विचारों का प्रतीक बनकर लड़ता आ रहा है। इस विरोध को अपील करती व्यवस्था बूथ पर नज़र नहीं आती है। राजनीति को समझने वाले कहते हैं कि अगर एनसीपी किसानों के पक्ष में Gen Z को जोड़ने की कवायद तेज करती है तो लोकतंत्र का सेफ्टी वॉल्व ठीक से काम करेगा।
