मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

रक्षाबंधन के पावन पर्व पर गुरुवार की रात बुरहानपुर के इंदिरा कॉलोनी क्षेत्र स्थित राजस्थानी भवन में आत्मीयता, स्नेह, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) के स्नेहिल आयोजन में आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा आयोजित गान, ज्ञान, ध्यान महासत्संग में व्यक्ति विकास केंद्र के साधकों ने ईश्वरीय आराधना, गुरु भक्ति, राष्ट्रभक्ति और जीवन दर्शन पर आधारित गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
खचाखच भरे राजस्थानी भवन का सभागृह भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा, जब साधकों ने स्वर दिया कि: “फूलों का तारों का, सबका कहना है, एक हज़ारों में हमारी बहना है…”। रक्षाबंधन के पावन पर्व और विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस के प्रति साधकों के आत्मीय स्नेह को अभिव्यक्त करते इस गीत ने उपस्थित श्रद्धालुओं और गणमान्य नागरिकों को भावविभोर कर दिया। इसके साथ ही “नदिया चले चले रे धारा, चंदा चले चले रे तारा, तुझको चलना होगा…” जैसे जीवन दर्शन और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाले गीतों ने पूरे वातावरण को प्रेरणादायी बना दिया। गीतों के माध्यम से जीवन में निरंतर कर्मशील रहने, परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए आगे बढ़ने और सकारात्मकता के साथ जीवन जीने का संदेश दिया गया।
भक्ति के रंग में झूम उठा राजस्थानी भवन
सत्संग के दौरान “नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की…” भजन की प्रस्तुति ने ऐसा आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया कि उपस्थित भक्तजन अपनी-अपनी जगह पर खड़े होकर भक्ति के रंग में झूम उठे। तालियों, भजनों और जयकारों से पूरा सभागृह गूंज उठा। वहीं, “यहां की रीत सदा, मैं गीत वहां के गाता हूं, भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं…” जैसे राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत गीत ने उपस्थितजनों के भीतर देशप्रेम और भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव का भाव जागृत कर दिया। भक्ति, जीवन दर्शन और राष्ट्रप्रेम से सजी इन प्रस्तुतियों ने गान, ज्ञान और ध्यान महासत्संग को यादगार बना दिया।
पुष्पवर्षा कर किया आत्मीय स्वागत
इस अवसर पर विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) ने उपस्थित साधकों, गुरु भक्तों एवं गणमान्य नागरिकों का पुष्पवर्षा कर आत्मीय स्वागत किया। रक्षाबंधन के अवसर पर अर्चना दीदी द्वारा भेजी गई राखी और उनके संदेश के रूप में प्रस्तुत कविता पाठ को भी उपस्थितजनों ने खूब सराहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गुरु भक्तों, साधकों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। सभी ने रक्षाबंधन के इस आयोजन को भाई-बहन के पवित्र रिश्ते, भारतीय संस्कृति और सामाजिक आत्मीयता का सुंदर उत्सव बताया।
रक्षाबंधन केवल रक्षा का वचन नहीं, परस्पर मंगलकामना का पर्व है-अर्चना चिटनिस
भावविभोर होते हुए श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि आप सभी के स्नेह, प्रेम और सहयोग के कारण ही हर पल अपने क्षेत्र और समाज के लिए कुछ बेहतर करने का जज़्बा बना रहता है। जनस्नेह और आत्मीय संबंध ही उन्हें निरंतर जनसेवा के लिए प्रेरित करते हैं।
आर्ट ऑफ लिविंग संस्था द्वारा आयोजित इस सुंदर एवं आत्मीय कार्यक्रम के लिए सभी को बधाई देते हुए उन्होंने रक्षाबंधन पर्व के महत्व पर सरल और सहज शब्दों में प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई द्वारा बहन की रक्षा का वचन देने का पर्व नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, आत्मीयता और एक-दूसरे के सुखी, स्वस्थ, संपन्न एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना का पावन उत्सव है। उन्होंने कहा कि बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और कीर्तिमान जीवन की कामना करती है। इसी प्रकार भाई भी अपनी बहन के सम्मान, सुरक्षा और सुख के प्रति सदैव संकल्पित रहता है।
श्रीमती चिटनिस ने विष्णु पुराण एवं वामन पुराण के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए रक्षाबंधन के धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में रिश्तों की आत्मीयता और उनके प्रति कर्तव्यबोध ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने अपने स्नेहिल संबोधन में कहा कि हमारा-तुम्हारा यह पवित्र भाई-बहन का रिश्ता जीवनपर्यंत इसी सुंदर आत्मीयता, विश्वास और स्नेह के भाव के साथ बना रहेगा।
संस्था ने अर्चना चिटनिस के सुखी, स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की
कार्यक्रम का संचालन आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के केंद्र प्रमुख एवं वरिष्ठ प्रशिक्षक एडवोकेट संतोष देवताले ने किया। उन्होंने संस्था की ओर से विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस का अभिनंदन करते हुए कहा कि यह संस्था के लिए सौभाग्य की बात है कि अर्चना दीदी का आर्ट ऑफ लिविंग परिवार के प्रति इतना स्नेह और आत्मीय भाव है। उन्होंने कहा कि संस्था परिवार श्रीमती अर्चना चिटनिस के सुखी, स्वस्थ, दीर्घायु और यशस्वी जीवन की मंगलकामना करता है तथा उनके जनसेवा के संकल्प को निरंतर सफलता मिलने की कामना करता है।
रक्षाबंधन के पावन अवसर पर आयोजित यह गान, ज्ञान, ध्यान महासत्संग केवल एक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि भाई-बहन के पवित्र रिश्ते, भारतीय संस्कारों, गुरु भक्ति, जीवन दर्शन और सामाजिक आत्मीयता का जीवंत उत्सव बन गया। देर रात तक भजनों, गीतों और आध्यात्मिक भावनाओं से सराबोर इस आयोजन ने उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के मन में प्रेम, प्रेरणा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया।
